देश के जाने-माने संवैधानिक विशेषज्ञ, संसदीय मामलों के विद्वान और पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. सुभाष सी. कश्यप का 97 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से कानूनी, राजनीतिक और शैक्षणिक जगत में शोक की लहर है। डॉ. सुभाष सी. कश्यप ने अपने आवास पर अंतिम सांस ली।
संसद से 37 वर्षों तक रहा जुड़ाव
डॉ. सुभाष सी. कश्यप का 10 मई 1929 को हुआ था। उन्होंने वर्ष 1953 में संसद सचिवालय से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद करीब 37 वर्षों तक वह संसद से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे। वर्ष 1984 से 1990 के बीच उन्होंने 7वीं, 8वीं और 9वीं लोकसभा के महासचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
संविधान और संसदीय मामलों के प्रख्यात विशेषज्ञ
डॉ. सुभाष सी. कश्यप भारतीय संविधान, संवैधानिक कानून और संसदीय कार्यप्रणाली के जानकारों में शामिल थे। उन्होंने जिनेवा स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर पार्लियामेंट्री डॉक्यूमेंटेशन (IPU) का नेतृत्व भी किया था। संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उनकी लिखी पुस्तकें और शोध कार्य आज भी संदर्भ सामग्री के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं।
कई राष्ट्रीय जिम्मेदारियों का किया निर्वहन
डॉ. सुभाष सी. कश्यप ने भारत सरकार के लिए पंचायती राज कानूनों और संस्थाओं के मानद संवैधानिक सलाहकार के रूप में भी सेवाएं दीं। इसके अलावा संविधान की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए गठित राष्ट्रीय आयोग के सदस्य रहे और उसकी ड्राफ्टिंग एवं एडिटोरियल कमेटी के अध्यक्ष की भूमिका भी निभाई। सार्वजनिक नीति और संवैधानिक सुधारों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर उनकी विशेषज्ञ राय को महत्व दिया जाता था।
2015 में मिला था पद्म भूषण सम्मान
सार्वजनिक मामलों और संवैधानिक अध्ययन के क्षेत्र में योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2015 में डॉ. सुभाष सी. कश्यप को पद्म भूषण से सम्मानित किया था। वह लंबे समय तक भारतीय राष्ट्रीय बार एसोसिएशन (INBA) के अध्यक्ष भी रहे।
राम जनम चौहान वर्तमान में MH One News के साथ जुड़े हुए हैं। वे मुख्य रूप से पॉलिटिक्स और नेशनल न्यूज़ को कवर करते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक जागरण संस्थान के साथ की। इसके अलावा Zee Media और India News में इंटर्नशिप की है। राम जनम चौहान ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज (गोकलपुरी, दिल्ली) से पत्रकारिता एवं जनसंचार (BJMC) की डिग्री प्राप्त की है।