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Bengal : ₹2500 महीने में बर्तन धोने वाली नेत्री बनी राज्य मंत्री, जानें इनकी पूरी कहानी…

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार का दिन कई मायनों में खास रहा। नई सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान राजभवन में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। जब राज्य मंत्री के रूप में कलिता माझी(Kalita Majhi) का नाम शपथ ग्रहण के लिए पुकारा गया तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। यह सिर्फ एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं थी बल्कि संघर्ष और मेहनत की जीत का प्रतीक भी थी। कलिता माझी का जीवन उन लाखों लोगों की कहानी जैसा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।

राजनीति में पहचान बनाने से पहले वह घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थीं। परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए वह घर-घर जाकर बर्तन धोने और अन्य घरेलू कामों में मदद करती थीं। उनकी मासिक आय लगभग 2,500 रुपये थी जिससे घर का खर्च चलाना आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने कभी मेहनत से पीछे हटने का रास्ता नहीं चुना। चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने अपना काम जारी रखा और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के साथ राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहीं।

जीत ने बदल दी जिंदगी

कलिता माझी के जीवन में बड़ा बदलाव उस समय आया जब उन्होंने विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज की। औसग्राम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते हुए उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार श्यामा प्रसन्न लोहार को हराया। इस मुकाबले में उन्हें एक लाख से अधिक वोट मिले और उन्होंने 12 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से जीत हासिल की। इस जीत की खास बात यह भी रही कि औसग्राम सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी को सफलता मिली। क्षेत्र में पार्टी के लिए यह ऐतिहासिक जीत मानी गई और कलिता माझी स्थानीय राजनीति का एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरीं।

राजनीति में सफलता उन्हें पहली कोशिश में नहीं मिली थी। साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया था। हालांकि उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और बड़ी संख्या में वोट हासिल किए।
उनकी मेहनत जनता के बीच सक्रियता और संगठन के प्रति समर्पण को देखते हुए पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया। इस बार उन्होंने न केवल चुनाव जीता बल्कि यह भी साबित किया कि निरंतर प्रयास और धैर्य अंततः सफलता तक पहुंचाते हैं।

कलिता की कहानी बनी प्रेरणा

कलिता माझी ने लगभग एक दशक पहले राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने किसी बड़े पद से नहीं बल्कि बूथ स्तर की कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। गांव और स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच काम करते हुए उन्होंने अपनी पहचान बनाई। पार्टी नेतृत्व ने उनके समर्पण और नेतृत्व क्षमता को पहचाना। वर्षों तक संगठन के लिए लगातार काम करने के बाद उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर मिला और अब मंत्री पद की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

कलिता माझी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति के सपनों को सीमित नहीं कर सकतीं। एक घरेलू सहायिका से विधायक और फिर मंत्री बनने तक का उनका सफर मेहनत, दृढ़ संकल्प और जनसेवा के प्रति समर्पण का परिणाम है। आज उनकी उपलब्धि सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं है बल्कि उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने लक्ष्य हासिल करने का सपना देखते हैं। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि लगातार प्रयास और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी ऊंचाई तक पहुंचा जा सकता है।

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