PM Modi Foreign Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से अपने छह दिवसीय पांच देशों के दौरे की शुरुआत करेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी सबसे पहले UAE जाएंगे। इसके बाद उनका दौरा नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली तक रहेगा। इस पूरी यात्रा में भारत की ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक साझेदारी और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर खास जोर रहेगा।
UAE दौरा क्यों माना जा रहा अहम
प्रधानमंत्री मोदी की अबू धाबी यात्रा को सबसे जरुरी माना जा रहा है। ऐसे समय में यह दौरा हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव बना हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव और समुद्री आवाजाही प्रभावित होने से दुनिया भर में तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसी बीच भारत अपने भरोसेमंद ऊर्जा साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और UAE के बीच LPG सप्लाई और रणनीतिक तेल भंडारण को लेकर बड़े समझौते हो सकते हैं। माना जा रहा है कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के बीच LPG सहयोग समझौते पर सिग्नेचर हो सकते हैं। इसके अलावा इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड और ADNOC के बीच रणनीतिक तेल भंडारण को लेकर भी नई सहमति बनने की संभावना है।
शेख मोहम्मद बिन जायद से होगी अहम मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की UAE यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से होने की संभावना है। इस बैठक में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, सांस्कृतिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से मजबूत आर्थिक और कूटनीतिक रिश्ते रहे हैं, जिन्हें और बढ़ावा देने की तैयारी है।
भारत के लिए कितना अहम है UAE
UAE भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल UAE भारत के लिए कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा स्रोत रहा, जिसने देश की कुल जरूरत का करीब 11 प्रतिशत हिस्सा पूरा किया। वहीं LPG सप्लाई के मामले में UAE भारत का सबसे बड़ा साझेदार है और देश की करीब 40 प्रतिशत जरूरत वहीं से पूरी होती है।
संकट आने पर भरोसेमंद रहा UAE
मौजूदा वैश्विक तनाव और तेल बाजार में अफरा-तफरी के बीच भी UAE को भारत का सबसे भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार माना जा रहा है। लंबे समय के सप्लाई समझौते भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसी वजह से इस दौरे में ऊर्जा सहयोग को सबसे प्रमुख एजेंडा माना जा रहा है।
रणनीतिक तेल भंडारण पर भी बढ़ेगा सहयोग
UAE पहला ऐसा देश है जिसने भारत के साथ रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण में साझेदारी की थी। साल 2018 में इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड और ADNOC के बीच समझौता हुआ था। इसके तहत UAE ने भारत की मंगलुरु स्थित सुविधा में 50 लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल जमा करने की व्यवस्था की थी।
भारत के पास कितना रणनीतिक तेल भंडार
इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत काम करने वाली सरकारी कंपनी है। यह देश के रणनीतिक कच्चे तेल भंडार को संभालने का काम करती है। फिलहाल कंपनी अपनी तीन भूमिगत सुविधाओं में करीब 53.3 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल सुरक्षित रखती है, ताकि किसी वैश्विक संकट या सप्लाई रुकावट की स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके।
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