पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार शुभेंदु अधिकारी(CM Suvendu Adhikari) ने दो विधानसभा सीटों में से एक को बनाए रखने का फैसला कर लिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़कर भवानीपुर सीट को अपने पास रखने का निर्णय किया है।
जानकारी के मुताबिक, हाल ही में हुए चुनाव में उन्होंने दो सीटों-नंदीग्राम और भवानीपुर-दोनों से जीत हासिल की थी। नंदीग्राम में उन्होंने पहले भी कड़ा मुकाबला जीतते हुए सुर्खियां बटोरी थीं, जबकि भवानीपुर सीट पर भी उन्हें बड़ी जीत मिली थी।
भवानीपुर से ली थी विधायक पद की शपथ
खबरों में यह भी कहा जा रहा है कि शपथ ग्रहण के दौरान उन्होंने भवानीपुर क्षेत्र से विधायक के रूप में पद की शपथ ली थी। हालांकि, चुनाव परिणाम आने के बाद उन्होंने पहले ही संकेत दिए थे कि वह दोनों में से किसी एक सीट को खाली करेंगे और इसका अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व पर छोड़ दिया जाएगा।
बताया जाता है कि उन्होंने यह भी कहा था कि वह तय समयसीमा के भीतर एक सीट से इस्तीफा देंगे, ताकि उपचुनाव की स्थिति स्पष्ट हो सके। साथ ही उन्होंने दोनों क्षेत्रों के मतदाताओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बनाए रखने की बात भी कही थी। अब उनके इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि आखिर वे किस रणनीति के तहत एक सीट पर कायम रहने का निर्णय कर रहे हैं।
छह मंत्रियों ने ली थी शपथ
छह मंत्रियों ने शपथ ली थी। इस सूची में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके दिलीप घोष के साथ-साथ भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदिराम टुडू और निशीथ प्रामाणिक शामिल थे, जिन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह छह सदस्यीय मंत्रिमंडल भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा माना गया जिसमें विभिन्न सामाजिक और क्षेत्रीय वर्गों का संतुलन साधने की कोशिश की गई।
इस टीम में ब्राह्मण, ओबीसी, जनजातीय समुदाय, मतुआ और राजबंशी जैसे अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व दिया गया। शुभेंदु अधिकारी ब्राह्मण समुदाय से आते हैं जबकि दिलीप घोष ओबीसी वर्ग से जुड़े हैं। अग्निमित्रा पॉल कायस्थ समुदाय का प्रतिनिधित्व करती हैं वहीं कीर्तनिया को मतुआ समाज का प्रमुख चेहरा माना जाता है। खुदिराम टुडू जंगलमहल क्षेत्र के आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और निशीथ प्रामाणिक उत्तर बंगाल के प्रभावशाली राजबंशी नेता के रूप में जाने जाते हैं।