फतेहपुर जिले की खागा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक कृष्णा पासवान(Krishna Paswan) के योगी आदित्यनाथ सरकार में संभावित कैबिनेट विस्तार के दौरान राज्य मंत्री बनाए जाने की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि रविवार को होने वाले इस फेरबदल में उन्हें जगह मिल सकती है। दलित समाज से आने वाली कृष्णा पासवान को पार्टी का एक मजबूत क्षेत्रीय और सामाजिक चेहरा माना जाता है और इस बार के विस्तार में जातीय संतुलन साधने पर भी खास जोर दिया जा रहा है।
इसके साथ ही, राजनीतिक गलियारों में यह भी माना जा रहा है कि केंद्र में नारी शक्ति वंदन बिल से जुड़े संवैधानिक संशोधन प्रस्ताव के पारित न हो पाने के बाद राज्य सरकार महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ाकर विपक्ष को जवाब देने की रणनीति अपना रही है।
ऐसा था कृष्णा पासवान का शुरुआती जीवन
1 अगस्त 1963 को फतेहपुर के पिलखिनी गांव में जन्मी कृष्णा पासवान की शुरुआती शिक्षा 10वीं तक हुई है। उनका जुड़ाव लंबे समय से कृषि कार्यों से रहा है। राजनीति में आने से पहले उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में भी काम किया और धीरे-धीरे जमीनी स्तर से उठकर जनप्रतिनिधि बनीं। खागा विधानसभा क्षेत्र में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। उन्होंने 2002, 2012 और 2022 में इस सीट से जीत दर्ज की है।
2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को लगभग 5500 वोटों के अंतर से हराया था। फिलहाल वे उत्तर प्रदेश विधानसभा की महिला एवं बाल विकास संबंधी संयुक्त समिति की सभापति भी हैं। अपने क्षेत्र में सक्रिय भूमिका के कारण वे अक्सर चर्चा में रहती हैं। हाल ही में उन्होंने खागा क्षेत्र में बनी एक घटिया सड़क को लेकर खुद फावड़ा चलाकर विरोध दर्ज कराया था जिसका वीडियो और तस्वीरें काफी वायरल हुई थीं।
राज्य मंत्री के चर्चित दावेदारों में से एक
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा सरकार कैबिनेट विस्तार के जरिए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश कर रही है। ऐसे में कृष्णा पासवान का नाम राज्य मंत्री पद के लिए सबसे चर्चित दावेदारों में शामिल है। उनकी नियुक्ति से पार्टी को बुंदेलखंड और फतेहपुर क्षेत्र में दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करने में मदद मिल सकती है।