AC Blast: दिल्ली के विवेक विहार इलाके में रविवार तड़के एक दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। चार मंजिला रिहायशी इमारत में लगी आग ने 9 लोगों की जान ले ली, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आग की शुरुआत एयर कंडीशनर (AC) में हुए ब्लास्ट से हुई, जिसने कुछ ही समय में पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया।
आग फैलने की रफ्तार ने छीना बचने का मौका
मौके पर मौजूद लोगों और जांच एजेंसियों के अनुसार, एसी में हुए धमाके के बाद आग इतनी तेजी से फैली कि दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल पर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल सका। आग की तीव्रता और धुएं ने हालात को और गंभीर बना दिया, जिससे बचाव कार्य में भी मुश्किलें आईं।
कब होता है AC ब्लास्ट ?
विशेषज्ञों के मुताबिक, एसी में आग लगने या ब्लास्ट होने के पीछे कई तकनीकी कारण हो सकते हैं। सबसे आम वजहों में शॉर्ट सर्किट, ओवरलोडिंग और खराब वायरिंग शामिल हैं। जब एसी लंबे समय तक लगातार चलता है, तो इसके कंप्रेसर पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे स्पार्क या विस्फोट का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, समय पर सर्विसिंग न होना और घटिया या लोकल पार्ट्स का इस्तेमाल भी खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।
इन हिस्सों में सबसे ज्यादा रहता है खतरा
एसी के कुछ कंपोनेंट ऐसे होते हैं जहां आग लगने की संभावना सबसे अधिक रहती है। कंप्रेसर यूनिट लगातार काम करने के कारण सबसे ज्यादा गर्म होती है और यहीं से आग शुरू होने का खतरा रहता है। इसके अलावा आउटडोर यूनिट का कैपेसिटर, पीसीबी (प्रिंटेड सर्किट बोर्ड), इनडोर यूनिट की वायरिंग, पावर केबल, फैन मोटर और रेफ्रिजरेंट पाइप भी संवेदनशील हिस्से होते हैं। इनमें खराबी या ढीलापन स्पार्क और आग का कारण बन सकता है।
लापरवाही कैसे बढ़ाती है खतरा
विशेषज्ञ बताते हैं कि एसी को लगातार 6 से 8 घंटे से ज्यादा चलाना खतरनाक हो सकता है। इससे मशीन ओवरहीट हो जाती है और हादसे की संभावना बढ़ जाती है। बहुत कम तापमान पर एसी चलाने से भी कंप्रेसर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। गंदे फिल्टर, धूल जमा होना और समय पर सफाई न करना भी एयरफ्लो को रोककर ओवरहीटिंग का कारण बनता है।
बचाव के लिए करें ये काम
ऐसे हादसों से बचने के लिए एसी का सही तरीके से इस्तेमाल बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर साल कम से कम दो बार प्रोफेशनल सर्विसिंग करानी चाहिए। एसी के लिए अलग पावर लाइन और सही क्षमता वाला एमसीबी लगवाना चाहिए। एक्सटेंशन बोर्ड का उपयोग करने से बचना चाहिए। अगर एसी से जलने की गंध, चिंगारी, अजीब आवाज या पानी टपकने जैसी समस्या दिखे, तो तुरंत उसे बंद कर देना चाहिए।
वोल्टेज और इंस्टॉलेशन भी है जरुरी
जिन क्षेत्रों में वोल्टेज फ्लक्चुएशन की समस्या रहती है, वहां स्टेबलाइजर का इस्तेमाल करना जरूरी है। यह एसी को हाई या लो वोल्टेज से बचाता है। साथ ही, इंस्टॉलेशन हमेशा अधिकृत तकनीशियन से ही कराना चाहिए, क्योंकि गलत फिटिंग या ढीले वायर भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। विवेक विहार का यह हादसा एक चेतावनी है कि छोटी-छोटी गलतियां कितनी बड़ी घटना में बदल सकती हैं।
Read More:

