गंगा एक्सप्रेसवे(Ganga Expressway) को केवल एक सड़क परियोजना के रूप में नहीं देखा जा रहा है बल्कि यह क्षेत्र में औद्योगिक बदलाव की मजबूत नींव बन सकता है। रायबरेली के ऊंचाहार से लेकर लालगंज तक इसे एक औद्योगिक गलियारे के रूप में विकसित करने की तैयारी है। ऊंचाहार में NTPC का बड़ा बिजली संयंत्र पहले से मौजूद है जबकि लालगंज में रेल कोच फैक्ट्री पूरी क्षमता के साथ काम कर रही है। ऐसे में यह एक्सप्रेसवे उद्योगों के विस्तार को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। इसके साथ ही किसानों के लिए भी यह काफी लाभकारी साबित हो सकता है।
औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना
ऊंचाहार के पास प्रस्तावित टोल प्लाजा के नजदीक करीब 200 एकड़ जमीन पर औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना है। इसके शुरू होने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यहां बनने वाले उत्पादों को नोएडा, मेरठ और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों तक जल्दी पहुंचाना आसान होगा जिससे परिवहन का समय और खर्च दोनों कम होंगे और माल के खराब होने का खतरा भी घटेगा।
किसानों को मंडियों में जल्दी पहुंचने की सुविधा
रायबरेली का कृषि क्षेत्र भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऊंचाहार, लालगंज और सलोन में मंडियां स्थापित हैं जहां किसान अपनी उपज बेचने आते हैं। फल और सब्जियां जल्दी खराब हो जाती हैं इसलिए समय पर बाजार तक न पहुंच पाने पर किसानों को अक्सर कम कीमत पर इन्हें बेचना पड़ता है। एक्सप्रेसवे बनने के बाद किसानों को दूर की मंडियों तक जल्दी पहुंचने की सुविधा मिलेगी जिससे उन्हें अपनी फसल का बेहतर दाम मिल सकेगा।
बेहतर सड़क संपर्क उद्योगों को रफ्तार
एक समय ऐसा भी था जब रायबरेली में लगभग 86 छोटे-बड़े उद्योग चलते थे और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध थे। लेकिन संसाधनों की कमी और अनदेखी के कारण धीरे-धीरे ये उद्योग बंद होते चले गए। वेस्पा फैक्ट्री और स्पिनिंग मिल जैसी कई इकाइयां परिवहन की दिक्कतों और बढ़ती लागत के चलते टिक नहीं पाईं। अब बेहतर सड़क संपर्क के साथ इन बंद पड़ी इकाइयों के दोबारा शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है जिससे क्षेत्र में फिर से औद्योगिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (29 अप्रैल) को लंबे समय से प्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेस-वे(Ganga Expressway) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के...