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ईरान जंग के बीच अमेरिका का बड़ा वार, चीनी तेल रिफाइनरी समेत 40 शिपिंग कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध, क्या है इसकी वजह?

US Sanctions Chinese Oil Refinery: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने बड़ा एक्शन लेते हुए चीन की एक प्रमुख रिफाइनरी और ईरान के तेल कारोबार से जुड़े कई जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इस कदम का उद्देश्य ईरान की तेल से होने वाली आय को सीमित करना और उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।

चीन पर अमेरिका का एक्शन

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ ने चीन की हेंगली पेट्रोकेमिकल (डालियान) रिफाइनरी कंपनी लिमिटेड पर प्रतिबंध लगाया है। यह कंपनी ईरान से कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल मानी जाती है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार, इस तरह के आर्थिक प्रतिबंध ईरानी शासन पर वित्तीय दबाव बढ़ाने, मध्य पूर्व में उसकी गतिविधियों को सीमित करने और उसके परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाने के लिए जरूरी हैं।

40 शिपिंग कंपनियों और जहाजों को निशाना बनाया गया

इस कार्रवाई के तहत करीब 40 शिपिंग कंपनियों और जहाजों को निशाना बनाया गया है, जिन्हें ईरान के तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा माना जाता है। इसके अलावा, 19 अन्य जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं, जो ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों को विभिन्न देशों तक पहुंचाने में लगे थे।

तेल कारोबार का बड़ा नेटवर्क

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ये जहाज वैश्विक स्तर पर तेल और गैस उत्पादों की आपूर्ति में शामिल थे, जिससे ईरानी सरकार को बड़ी मात्रा में राजस्व मिलता था। चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें ‘टीपॉट्स’ कहा जाता है, ईरान के तेल के प्रमुख खरीदार हैं और हेंगली इस क्षेत्र की बड़ी कंपनियों में से एक है।

US ने लगाया आरोप

अमेरिका का आरोप है कि हेंगली रिफाइनरी ने ‘सेपेहर एनर्जी जहान नामा पार्स कंपनी’ के जरिए प्रतिबंधित जहाजों से तेल प्राप्त किया। इन शिपमेंट्स का संबंध ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ से बताया गया है, जिससे सैन्य गतिविधियों के लिए वित्तीय संसाधन जुटाए गए।

ट्रंप प्रशासन ने दी चेतावनी

अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसे जहाजों, बिचौलियों और खरीदारों पर कार्रवाई जारी रहेगी, जो ईरान के तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति या संस्था को अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।

विदेशी कंपनियों को भी चेताया

ट्रेजरी विभाग के मुताबिक, फरवरी 2025 से अब तक ईरान से जुड़े 1,000 से अधिक व्यक्तियों, संस्थाओं, जहाजों और विमानों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। अमेरिकी कानून के तहत, प्रतिबंधित संस्थाओं की अमेरिका में मौजूद संपत्ति फ्रीज कर दी जाती है और अमेरिकी नागरिकों को उनके साथ लेन-देन करने से रोका जाता है। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो विदेशी कंपनियां इस तरह के कारोबार में सहयोग करती हैं, उन्हें भी सजा का सामना करना पड़ सकता है। इससे वैश्विक स्तर पर ईरान के तेल व्यापार पर असर पड़ने की संभावना है।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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