Char Dham Yatra 2026: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को लेकर इस बार सरकार ने बड़ा और अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यात्रा मार्ग पर मिलने वाले खाने की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने और सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्ती करने का निर्देश दिया है। इस पहल का उद्देश्य तीर्थयात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ यात्रा अनुभव देना है।
हर साल उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब
चारधाम यात्रा के दौरान बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। कठिन पहाड़ी रास्तों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह बना रहता है, लेकिन रास्ते में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता अक्सर चिंता का विषय रही है।
खाने की गुणवत्ता पर सख्त नजर
इस बार सरकार ने इसी समस्या को प्राथमिकता दी है। यात्रा मार्ग पर ढाबों और होटलों में मिलने वाले खाने की नियमित जांच की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की मिलावट या बासी भोजन से यात्रियों की सेहत पर असर न पड़े। खराब भोजन के कारण यात्रा का अनुभव खराब न हो, इसके लिए सख्त निगरानी रखी जाएगी।
‘हरित चारधाम’ अभियान की शुरुआत
सरकार ने इस बार ‘हरित चारधाम’ थीम के तहत यात्रा आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसका मतलब केवल पर्यावरण संरक्षण ही नहीं, बल्कि शुद्ध भोजन, स्वच्छता और प्लास्टिक मुक्त वातावरण सुनिश्चित करना भी है। इस अभियान को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी खाद्य संरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग को दी गई है।
मोबाइल वैन और टीमें रहेंगी सतर्क
यात्रा मार्ग पर मोबाइल फूड सेफ्टी वैन तैनात की गई हैं, जो मौके पर ही खाद्य पदार्थों की जांच करेंगी। इसके अलावा क्विक रिस्पांस टीमें भी बनाई गई हैं, जो शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई करेंगी। यात्रियों की सुविधा के लिए टोल-फ्री नंबर 18001804246 भी जारी किया गया है, जिस पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
कारोबारियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
सरकार केवल जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूकता पर भी जोर दे रही है। विभिन्न क्षेत्रों में होटल और ढाबा संचालकों के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। अब तक 250 से अधिक कारोबारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिसमें उन्हें साफ-सफाई और स्वास्थ्य मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
खाने में कम तेल-नमक की सलाह
प्रशिक्षण के दौरान कारोबारियों को खाने में तेल, नमक और चीनी का कम उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। चूंकि यात्रा में शामिल कई श्रद्धालु मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से पीड़ित होते हैं, इसलिए यह कदम उनके स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस्तेमाल किए तेल से बनेगा बायोफ्यूल
सरकार ने एक और अहम पहल के तहत निर्देश दिया है कि खाना पकाने के तेल का तीन बार से ज्यादा उपयोग न किया जाए। इस्तेमाल किए गए तेल को फेंकने के बजाय बायोफ्यूल बनाने के लिए एकत्र किया जाएगा। इससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को फायदा मिलेगा।
प्लास्टिक पर सख्ती
चारधाम यात्रा को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्त प्रतिबंध लगाया जा रहा है। सरकार ‘रिड्यूस, रियूज और रिसाइकिल’ के सिद्धांत पर काम कर रही है, ताकि पवित्र स्थलों की साफ-सफाई बनी रहे।
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