नोएडा में बढ़ते ट्रैफिक और उससे पैदा हो रहे शोर से परेशान लोगों को अब कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। प्रशासन ने शहर की प्रमुख एलिवेटेड सड़कों(Noida roads) पर साउंड बैरियर लगाने का फैसला किया है, ताकि आसपास रहने वाले लोगों को वाहनों के हॉर्न और ट्रैफिक के लगातार शोर से बचाया जा सके। यह कदम लंबे समय से मिल रही स्थानीय निवासियों की शिकायतों के बाद उठाया गया है।
दरअसल, एमपी-2 और डीएससी रोड पर बने एलिवेटेड रोड पिछले साल नवंबर में शुरू किए गए थे। इनसे ट्रैफिक जाम में तो कमी आई, लेकिन शोर की समस्या बढ़ गई। दिन-रात दौड़ते वाहनों और लगातार बजते हॉर्न ने आसपास के सेक्टरों और सोसायटियों में रहने वालों की दिनचर्या को प्रभावित करना शुरू कर दिया।
रात के समय बढ़ जाता है शोर
इन एलिवेटेड सड़कों के आसपास बड़ी संख्या में रिहायशी इलाके, गांव और हाउसिंग सोसायटी मौजूद हैं। यहां के लोगों का कहना है कि रात के समय भी शोर इतना ज्यादा होता है कि आराम से सो पाना मुश्किल हो जाता है। इससे बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की सेहत और लोगों की सामान्य जीवनशैली पर असर पड़ रहा है। कई बार शिकायत करने के बाद अब प्राधिकरण ने इस समस्या के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाया है।
सड़कों पर लगाए जाएंगे साउंड बैरियर
अधिकारियों के अनुसार, इन सड़कों पर ऐसे साउंड बैरियर लगाए जाएंगे जो ध्वनि को नियंत्रित कर उसे आसपास के इलाकों तक पहुंचने से रोकेंगे। इस योजना को मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा।
बताया जा रहा है कि एक एलिवेटेड रोड पर साउंड बैरियर लगाने में लगभग 19 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं, भंगेल एलिवेटेड रोड पर आने वाले खर्च का अनुमान भी जल्द तैयार किया जाएगा। परियोजना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी परीक्षण आईआईटी से कराया जाएगा।
बाद में होगी ध्वनि स्तर की जांच
साउंड बैरियर लगाने से पहले और बाद में ध्वनि स्तर की जांच की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वास्तव में शोर में कमी आई है या नहीं। इससे पहले भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने जैसे प्रयास किए गए थे, लेकिन वे ज्यादा कारगर साबित नहीं हुए। ऐसे में अब साउंड बैरियर को स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि एलिवेटेड रोड बनने से यातायात तो सुगम हुआ है, लेकिन शोर की समस्या खासकर रात में और गंभीर हो जाती है, जब भारी वाहन गुजरते हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि यह योजना कब तक जमीन पर उतरती है और उन्हें शोर से कितनी राहत मिलती है।