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बेअदबी पर पंजाब सरकार का सख्त प्रहार, पास हुआ अहम संशोधन विधेयक, उम्रकैद और ₹25 लाख जुर्माना तय”

पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान(Punjab Government) ने “श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन विधेयक 2026” पेश किया, जिसे सभी सदस्यों ने एकमत से मंजूरी दे दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कानून फिलहाल केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों पर लागू होगा।

नए संशोधन के तहत यदि कोई व्यक्ति श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का दोषी पाया जाता है, तो उसे उम्रकैद (टिल डेथ) की सजा दी जा सकेगी। इसके साथ ही दोषी पर अधिकतम 25 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इस अपराध को गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है, ताकि आरोपी आसानी से कानून से बच न सकें।

अन्य धर्मों को नहीं किया गया शामिल

सरकार ने साफ किया है कि इस संशोधन में अभी केवल सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ को ही शामिल किया गया है। अन्य धर्मों—जैसे हिंदू, मुस्लिम या ईसाई के धार्मिक ग्रंथों और स्थलों से जुड़ी बेअदबी के मामलों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, सरकार का कहना है कि सभी समुदायों से चर्चा के बाद भविष्य में इस दायरे को बढ़ाया जा सकता है।

विधानसभा से पारित होने के बाद अब इस विधेयक को राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। यदि कानूनी प्रक्रिया में कोई अड़चन नहीं आती और यह केंद्र के कानूनों से टकराव में नहीं पाया जाता, तो इसे अप्रैल के अंत या मई 2026 की शुरुआत तक लागू किया जा सकता है।

बरगाड़ी कांड बना अहम कारण

साल 2015 का बरगाड़ी बेअदबी मामला पंजाब के सबसे संवेदनशील घटनाक्रमों में से एक रहा है। उस समय मौजूदा कानूनों को कमजोर माना गया था, जिससे दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिल सकी। इसी पृष्ठभूमि और जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सजा को और सख्त बनाने का फैसला लिया।

कानूनी जानकारों के अनुसार, यह विधेयक अदालत में चुनौती का सामना कर सकता है। वजह यह है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 सभी के लिए समान कानून की बात करता है, जबकि यह संशोधन केवल एक धार्मिक ग्रंथ पर केंद्रित है। ऐसे में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग प्रावधान होने पर सवाल उठ सकते हैं।

पहले के विधेयक से अलग है नया संशोधन

पंजाब सरकार का कहना है कि यह राज्य का विषय है, इसलिए इसे राष्ट्रपति के पास भेजना जरूरी नहीं होगा। हालांकि, राज्यपाल की कानूनी टीम यह सुनिश्चित करेगी कि यह कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों के साथ किसी प्रकार का टकराव न पैदा करे।

इससे पहले 2025 में जो विधेयक पेश किया गया था, उसमें सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथों को शामिल किया गया था और वह अभी भी लंबित है। वहीं, 2026 का यह संशोधन विशेष रूप से श्री गुरु ग्रंथ साहिब के सम्मान और मर्यादा की सुरक्षा पर केंद्रित है।

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