US-Iran Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर पर सहमति बनने के बाद पाकिस्तान अपनी भूमिका को लेकर दावा कर रहा है, लेकिन इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल भी उठने लगे हैं। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने इस्लामाबाद की मध्यस्थता को लेकर स्पष्ट रूप से संदेह जताया है और उसे ‘भरोसेमंद पक्ष’ मानने से इनकार किया है।
पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल
राजदूत रूवेन अजार ने कहा कि इजरायल पाकिस्तान को एक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में नहीं देखता। उनके अनुसार, अमेरिका ने अपने कुछ कारणों से पाकिस्तान की भूमिका का इस्तेमाल किया हो सकता है, लेकिन इससे उसकी विश्वसनीयता साबित नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी अमेरिका ने कतर और तुर्की जैसे देशों को हमास के साथ बातचीत में शामिल किया है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर मध्यस्थ विश्वसनीय हो। पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों के आदान-प्रदान में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का दावा कर रहा है, जिससे वह इस सीजफायर का श्रेय लेने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान ने खुद को बताया ‘भरोसेमंद मध्यस्थ’
वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सीजफायर के बाद इस्लामाबाद में मीडिया से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान को अब क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर एक “भरोसेमंद” मध्यस्थ के रूप में पहचान मिल रही है। उन्होंने इस समझौते को देश के नेतृत्व की बड़ी सफलता बताया और कहा कि यह पाकिस्तान के लिए एक नए दौर की शुरुआत है। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच यह युद्धविराम पाकिस्तान के प्रयासों का नतीजा है और इससे क्षेत्र में स्थिरता आएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि अरब देशों, ईरान और अमेरिका सभी पाकिस्तान पर भरोसा जता रहे हैं।
कूटनीतिक मतभेदों के बीच बढ़ी बयानबाजी
सीजफायर को लेकर जहां पाकिस्तान अपनी भूमिका को प्रमुख बता रहा है, वहीं इजरायल का रुख इससे अलग दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कूटनीतिक मतभेद भी उजागर होते हैं। फिलहाल, अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह अस्थायी युद्धविराम क्षेत्रीय तनाव को कम करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, लेकिन इसमें किसकी कितनी भूमिका रही, इसे लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
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