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ईरान की मदद के लिए जुटाया चंदा नहीं जाएगा भारत से बाहर, आखिर क्या है इस अड़चन की वजह

भारत में ईरान का दूतावास पिछले कुछ दिनों से युद्ध राहत के लिए चंदा इकट्ठा कर रहा है, लेकिन अब इस प्रक्रिया में बड़ी अड़चन सामने आई है। दूतावास द्वारा जुटाई गई राशि को सीधे ईरान ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। ऐसे में अब इस फंड का इस्तेमाल भारत में ही दवाएं खरीदने के लिए किया जाएगा।

नियमों के कारण बदली प्रक्रिया

शुरुआत में दूतावास ने अपने मुख्य बैंक खाते के जरिए चंदा मांगा था, लेकिन बाद में नियमों के अनुसार स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में अलग खाता खोला गया। विदेशी मिशनों को नकद या अनौपचारिक माध्यमों से चंदा लेने की अनुमति नहीं होती, इसलिए अब सभी दान केवल अधिकृत बैंक खाते के जरिए ही स्वीकार किए जा रहे हैं।

दवाएं खरीदकर भेजेगा ईरान

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने भारत में जुटाए गए फंड से दवाएं खरीदने का फैसला किया है और इसके लिए अनुमति भी मिल चुकी है। भारत पहले ही ईरान को दवाओं की एक खेप भेज चुका है। हालांकि, हाल ही में अमेरिकी हमले में एक विमान क्षतिग्रस्त होने के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है। अब नई उड़ान के जरिए दवाएं भेजने की योजना बनाई जा रही है।

सोना-आभूषण भी सीधे नहीं भेजे जा सकते

सूत्रों के अनुसार, कश्मीर समेत कई जगहों से मिले सोने और आभूषणों को भी सीधे ईरान नहीं भेजा जा सकता। इन्हें पहले भारत में बैंक में जमा कर नकदी में बदलना होगा। यहां तक कि ‘डिप्लोमैटिक पाउच’ के जरिए भी इस तरह की वस्तुएं भेजने की अनुमति नहीं है।

राजनयिक नियमों के कारण फंड ट्रांसफर में बाधा

वियना कन्वेंशन के तहत दूतावासों को बैंकिंग अधिकार तो मिलते हैं, लेकिन उनका उपयोग सीमित उद्देश्यों के लिए ही किया जा सकता है। चंदा इकट्ठा करने और उसे विदेश भेजने की प्रक्रिया पर सख्त नियम लागू होते हैं, जिसके चलते यह राशि फिलहाल भारत में ही अटकी हुई है।

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