ईरान की मदद के लिए कश्मीर में एक अनोखी एकजुटता देखने को मिल रही है। सांप्रदायिक सीमाओं से परे लोग बड़े पैमाने पर राहत अभियान में शामिल हो रहे हैं। श्रीनगर के जादिबल, हसनबाद, शालीमार, हरवान, कमरवारी, लावेपोरा, फतेकदल और बेमिना समेत कई इलाकों में लगातार दूसरे दिन भी दान अभियान आयोजित किए गए। इसी तरह बडगाम, बांदीपोरा और बारामूला में भी लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
दो दिन में 600 करोड़ से ज्यादा का अनुमान
सामुदायिक समूहों के अनुसार, महज दो दिनों में दान की राशि 600 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने का अनुमान है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे कश्मीर की संवेदनशीलता और इंसानियत की मिसाल बताया है। इस अभियान में लोगों ने दिल खोलकर दान किया। नकद और चेक के अलावा सोने-चांदी के आभूषण, तांबे के बर्तन, मोटरबाइक, टिपर ट्रक और पशुधन तक दान में दिए गए। महिलाओं ने अपनी पारिवारिक धरोहरें समर्पित कर दीं, वहीं बच्चों ने भी अपनी गुल्लक तोड़कर बचत दान में दे दी। दान अभियान के दौरान कई भावुक कर देने वाले उदाहरण सामने आए। एक विधवा महिला ने अपने दिवंगत पति की याद में संभालकर रखा सोना दान कर दिया। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने इस भाव को ईरान के लोगों के लिए “सबसे बड़ा सुकून” बताया और कश्मीरियों का आभार जताया।
सांप्रदायिक एकता की मजबूत मिसाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अभियान पूरी तरह मानवीय आधार पर चल रहा है और इसमें सभी समुदायों की भागीदारी है। हवाल की निवासी सैयदा हुरमत ने कहा कि इसमें शिया और सुन्नी दोनों समुदाय बराबर सहयोग कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि यह उनका कर्तव्य है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर मदद पर्याप्त नहीं दिख रही।
अधिकारियों ने जारी किए नए दिशा-निर्देश
इस बीच प्रशासन ने रमजान 2026 के दौरान दान संग्रह को लेकर नए नियम लागू किए हैं। इसके तहत मस्जिद समितियों और गैर-सरकारी संगठनों को पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा और फंड जुटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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