हिमाचल प्रदेश सरकार शहरी क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए ‘नक्शा परियोजना’ को पायलट आधार पर शुरू करने जा रही है। इस पहल के तहत सोलन, मंडी, पालमपुर और नादौन जैसे चार शहरों में ड्रोन कैमरा तकनीक से भूमि का सर्वेक्षण किया जाएगा और सटीक भू-मानचित्र तैयार किए जाएंगे।
ड्रोन तकनीक से होगा सटीक सर्वे
परियोजना के तहत ड्रोन के जरिए जमीन की मैपिंग कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे। इससे जमीन की सही स्थिति, सीमाएं और स्वामित्व से जुड़ी जानकारी अधिक स्पष्ट और प्रमाणिक रूप से उपलब्ध हो सकेगी।
लाइव जमाबंदी की दिशा में बड़ा कदम
राज्य सरकार ‘लाइव जमाबंदी’ प्रणाली लागू करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। इसके तहत म्यूटेशन के बाद भूमि स्वामित्व का विवरण जमाबंदी में अपडेट हो जाएगा। इससे नागरिकों को रियल टाइम में अपने भूमि रिकॉर्ड की जानकारी मिल सकेगी और सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम लगेंगे।
भूमि विवादों में आएगी कमी
इस डिजिटल पहल से जमीन से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद है। पारदर्शी और अपडेटेड रिकॉर्ड होने से स्वामित्व को लेकर होने वाले विवादों का तेजी से समाधान संभव होगा।
आपदा प्रभावित ढांचे के लिए 2700 करोड़
इसके साथ ही राज्य सरकार ने ‘रेडी एचपी’ परियोजना के तहत आपदाओं से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण और सुदृढ़ीकरण के लिए करीब 2700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस योजना के तहत 2023 और उसके बाद प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित सड़कों, पुलों और भवनों को मजबूत किया जाएगा।
आजीविका सुधार के लिए 200 करोड़ की योजना
सरकार ने आजीविका को मजबूत करने के लिए करीब 200 करोड़ रुपये की योजना भी बनाई है। इसके तहत बुनाई, कढ़ाई, जूता निर्माण, धातु शिल्प, ऊन उद्योग, बागवानी, मधुमक्खी पालन और सामुदायिक पर्यटन समेत 12 क्षेत्रों में विकास किया जाएगा। इस पहल से कारीगरों, किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को नए अवसर मिलेंगे। कौशल विकास और बाजार से जुड़ाव के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
Read More

