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ग्राहकों के लिए तरसी सोने की दुकान, एक दशक पुराने कारोबारी को मजबूरन लगाना पड़ा चाय-पकौड़े का ठेला

बिहार के रोहतास में एक सोने के व्यापारी ने अपनी दुकान में चाय और पकौड़े बेचना शुरू कर दिया है, क्योंकि ग्राहकों की संख्या में भारी कमी आ गई है। एक दशक से भी ज़्यादा समय से इस व्यापार में सक्रिय सच्चिदानंद प्रसाद ने बताया कि इस संकट के दौर में अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उनके पास कोई और विकल्प नहीं बचा था।

दुकान पूरे दिन पड़ी खाली

प्रसाद ने कहा, “मेरी दुकान सुबह से शाम तक ग्राहकों से गुलज़ार रहती थी। शादी-ब्याह और त्योहारों के मौसम में तो दुकान के अंदर खड़े होने की भी जगह नहीं बचती थी। लेकिन, पिछले कुछ महीनों में हालात पूरी तरह बदल गए हैं। अब तो दुकान पूरे दिन खाली पड़ी रहती है और ग्राहकों का आना-जाना न के बराबर रह गया है।”

सोने की खरीदारी से बचने की अपील से हैरान प्रसाद ने कहा, “मुझे समझ ही नहीं आ रहा कि उन्होंने ऐसा निर्देश क्यों जारी किया है। एक तरफ चीन सोने की खरीदारी करके अपनी अर्थव्यवस्था को मज़बूत कर रहा है, वहीं भारत में सोने की खरीदारी पर एक साल के लिए लगभग रोक ही लगा दी गई है। जब ग्राहक हमारी दुकान पर आ ही नहीं रहे हैं, तो हमें मजबूरन चाय-पकौड़े का ठेला लगाना पड़ा है।”

आमदनी पूरी तरह से ठप

उन्होंने बताया कि सोने का व्यापार पूरी तरह से भरोसे और ग्राहकों की खरीदारी पर निर्भर करता है। उन्होंने आगे कहा, “जब लोग सोना खरीदना बंद कर देते हैं, तो व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ता है। दुकान का किराया, बिजली का बिल, कर्मचारियों की तनख्वाह और दूसरे खर्चे तो लगातार बढ़ते रहते हैं, जबकि आमदनी पूरी तरह से ठप हो जाती है। अब तो परिवार का गुज़ारा करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।”

प्रसाद कई सालों से सर्राफा व्यापार से जुड़े हुए हैं और अपने इलाके में उनकी अच्छी-खासी साख है। लेकिन, बाज़ार में आई इस मंदी ने उनकी आर्थिक स्थिति को बुरी तरह से प्रभावित किया है।

मुख्य पार्षद शशि कुमारी, जिन्होंने चाय-पकौड़ा स्टॉल का उद्घाटन किया, ने व्यापारियों के सामने आने वाली कठिनाइयों को एक गंभीर चिंता का विषय माना और ज़ोर देकर कहा कि सरकार को कोई भी फैसला या अपील जारी करने से पहले छोटे व्यापारियों की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए।

“व्यापारी समुदाय देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। अगर छोटे दुकानदारों को परेशानी होती है, तो इसका असर समाज और बाज़ार, दोनों पर पड़ेगा। सरकार को ऐसे उपाय लागू करने चाहिए जिनसे व्यापार की निरंतरता बनी रहे और साथ ही लोगों की आजीविका भी सुरक्षित रहे”।

 

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