Monday, March 9, 2026
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एसिड अटैक पीड़ितों के लिए सरकारी नौकरी की बनाई जाए व्यवस्था, SC ने राज्य सरकारों को दिया निर्देश

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सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास को लेकर केंद्र सरकार और सभी राज्यों को अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि सरकारें ऐसी स्पष्ट नीति तैयार करें, जिसके तहत तेजाब हमले के पीड़ितों को सरकारी नौकरी दी जा सके। हालांकि अगर किसी कारण उन्हें सरकारी रोजगार देना संभव नहीं है, तो उनके लिए जीवन निर्वाह भत्ता या गुजारा भत्ता देने की व्यवस्था की जाए।

राज्य सरकारों से मांगा जवाब

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सवाल किया कि सरकारी विभागों में एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास के लिए अब तक कोई ठोस नीति क्यों नहीं बनाई गई। अदालत ने सरकारों को इस संबंध में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

भत्ता देने के लिए बनाएं योजना

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी राज्य को पीड़ितों को सरकारी नौकरी देने में व्यावहारिक या प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, तो कम से कम उनके लिए नियमित निर्वाह भत्ता देने की योजना बनाई जानी चाहिए, ताकि उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके।

डिजिटल KYC को आसान बनाने के लिए मांग

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया गया कि एसिड अटैक पीड़ितों को रोजमर्रा की कई जरूरी प्रक्रियाओं में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बैंक खाता खोलने, आधार कार्ड बनवाने, संपत्ति की रजिस्ट्री कराने या मोबाइल सिम लेने जैसी प्रक्रियाओं में डिजिटल केवाईसी के कारण परेशानी होती है। बायोमेट्रिक पहचान के लिए पलकें झपकाना या फिंगरप्रिंट देना कई पीड़ितों के लिए संभव नहीं होता, जिससे उन्हें सरकारी और बैंकिंग सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाई होती है। इसलिए पीड़ितों की ओर से अदालत में यह भी मांग की गई कि केंद्र सरकार को निर्देश दिए जाएं कि डिजिटल केवाईसी प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाया जाए और ऐसे मामलों के लिए वैकल्पिक पहचान व्यवस्था तैयार की जाए।

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