ईरान में असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने रविवार को आयतुल्लाह सैयद मुजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त कर दिया। यह फैसला अमेरिका और इजराइल की चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए लिया गया। आधिकारिक बयान में कहा गया कि 56 वर्षीय मुजतबा खामेनेई को असेंबली के प्रतिनिधियों के महत्वपूर्ण मतदान के आधार पर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का तीसरा सर्वोच्च नेता चुना गया है।
पिता की मौत के बाद शुरू हुई थी चर्चा
मुजतबा खामेनेई पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के बेटे हैं। अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमलों में मौत हो गई थी। इसके बाद से ही यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि उनके उत्तराधिकारी के तौर पर मुजतबा खामेनेई का नाम आगे आ सकता है। नौ दिनों तक चले राजनीतिक और सैन्य तनाव के बीच आखिरकार मौलवियों की परिषद ने उन्हें नया नेता घोषित कर दिया।
अमेरिका और इजराइल ने दी चेतावानी
मुजतबा खामेनेई के संभावित चयन को लेकर अमेरिका और इजराइल ने पहले ही कड़ा रुख दिखाया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह मुजतबा को पसंद नहीं करते और नए नेता के चयन में उनकी राय सुनी जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर उन्हें अमेरिकी समर्थन नहीं मिला तो उनका कार्यकाल लंबा नहीं चल पाएगा। इजराइल ने भी यह बयान दिया था कि अली खामेनेई का जो भी उत्तराधिकारी बनेगा, वह उसे निशाना बना सकता है।
ईरान ने बाहरी दखल को किया खारिज
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने इन प्रतिक्रियाओं पर जवाब देते हुए कहा कि देश के नेतृत्व का फैसला पूरी तरह ईरान का आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा कि किसी भी बाहरी शक्ति को इसमें हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मुजतबा खामेनेई को ईरान की रूढ़िवादी राजनीति का प्रमुख चेहरा माना जाता है। उनका इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) से भी करीबी संबंध बताया जाता है। इससे पहले 2019 में अमेरिका ने उन पर प्रतिबंध लगाए थे।