अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान में कई ठिकानों पर नए हवाई हमले किए, जबकि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई की। इस बीच मशहद जाने वाले मार्ग पर दो पुलों पर हमले की भी खबर सामने आई है, जहां दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार होना है। दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव गहरा गया है।
युद्ध ने फिर पकड़ी रफ्तार
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर व्यापक हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सहयोगी देशों की ओर ड्रोन और मिसाइलें दागीं। इस घटनाक्रम ने पूरे मध्य-पूर्व में सुरक्षा चिंता बढ़ा दी हैं।
मशहद जाने वाले मार्ग के पुल बने निशाना
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड का दावा है कि मशहद की ओर जाने वाले मार्ग पर दो पुलों को निशाना बनाया गया। मशहद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई का होम टाउन है और उनका जनाजा यहां पहुंचने वाले है, इससे पहले ही अमेरिका ने स्ट्राइक कर दी। ईरान ने आरोप लगाया कि इस हमले का उद्देश्य अंतिम संस्कार के दौरान दबाव बनाना और मनोवैज्ञानिक संदेश देना था। जबकि अमेरिका ने इन दावों पर अलग से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
जेडी वेंस ने ईरान को दी सख्त चेतावनी
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि यदि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ में अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाना जारी रखा तो अमेरिका और अधिक कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि हालिया अभियान का उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, युद्ध के दौरान अमेरिका को सैन्य उपकरणों का भी नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं दोनों देशों के बीच लगातार हो रहे हमलों से क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

