Yogi Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रिमंडल विस्तार के आठ दिन बाद नए मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया है। सरकार में शामिल किए गए छह नए और दो प्रोन्नत राज्य मंत्रियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। विभागों के बटवारें में राजनीतिक और संगठनात्मक संतुलन की झलक साफ दिखाई दी।
मनोज पांडेय को मिला कौन सा विभाग?
राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा के समर्थन में खुलकर सामने आए मनोज पांडेय को खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति विभाग दिया गया है। यह सरकार का बेहद जरुरी विभाग माना जाता है क्योंकि इसी के जरिए मुफ्त राशन वितरण योजना संचालित होती है। राजनीतिक जानकार इस फैसले को भाजपा की रणनीतिक चाल के रूप में देख रहे हैं।
भूपेंद्र चौधरी की सरकार में वापसी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद सरकार में लौटे भूपेंद्र चौधरी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह विभाग सरकार की महत्वाकांक्षी एक जिला, एक उत्पाद यानी ओडीओपी योजना से जुड़ा हुआ है। प्रदेश में रोजगार और उद्योग बढ़ाने के लिहाज से इसे अहम विभाग माना जाता है।
प्रोन्नत मंत्रियों को मिला स्वतंत्र प्रभार
राज्यमंत्री से प्रोन्नत होकर स्वतंत्र प्रभार पाने वाले अजित सिंह पाल को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग सौंपा गया है। वहीं सोमेंद्र तोमर को राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण और प्रांतीय रक्षक दल विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों नेताओं को स्वतंत्र प्रभार देकर सरकार ने संगठन और प्रशासनिक अनुभव को महत्व देने का संकेत दिया है।
नए मंत्रियों को भी मिली अहम जिम्मेदारी
राज्यमंत्री कृष्णा पासवान को पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग दिया गया है। वहीं कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा सुरेंद्र दिलेर को राजस्व विभाग और हंस राज विश्वकर्मा को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग में जिम्मेदारी दी गई है।
राकेश सचान का घटा राजनीतिक कद
इस नए विभागीय बंटवारे के बाद योगी सरकार में मंत्री राकेश सचान का कद घटा माना जा रहा है। उनसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग वापस ले लिया गया है। अब उनके पास केवल खादी, रेशम और हथकरघा उद्योग विभाग ही बचा है।
10 मई को हुआ था मंत्रिमंडल विस्तार
योगी सरकार का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार 10 मई को हुआ था। इसके बाद से ही विभागों के बंटवारे को लेकर इन्तजार किया जा रहा था। रविवार देर शाम जब विभागों की घोषणा हुई तो उसमें जातीय और राजनीतिक समीकरणों की साफ झलक देखने को मिली। माना जा रहा है कि सरकार ने आगामी राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए यह संतुलन साधने की कोशिश की है।
Read More:

