महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो सका। सदन में लंबी चर्चा और वोटिंग प्रक्रिया के बाद भी यह बिल आवश्यक बहुमत हासिल करने में विफल रहा। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग के दौरान 489 सांसदों में से 278 ने पक्ष में और 211 ने विरोध में वोट दिया, जिससे बिल गिर गया। बाद में जारी आंकड़ों में पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट बताए गए, लेकिन यह भी दो-तिहाई बहुमत से कम रहा।
सरकार ने अन्य बिल भी वापस लिए
इस विधेयक के साथ सरकार द्वारा पेश किए गए दो अन्य बिल भी वापस ले लिए गए। वहीं, लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर शनिवार सुबह 11 बजे तक के लिए टाल दी गई।
अमित शाह का विपक्ष पर हमला
गृहमंत्री अमित शाह ने बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ है। शाह ने कहा कि सरकार महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए हर संभव संघर्ष करेगी और 2029 तक महिला सशक्तिकरण का वादा पूरा किया जाएगा।
दो-तिहाई बहुमत बना सबसे बड़ी बाधा
संवैधानिक संशोधन होने के कारण इस बिल को पारित करने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता थी। वर्तमान में एनडीए के पास लोकसभा में 293 सांसद हैं, जो कुल का लगभग 54 प्रतिशत है, जबकि विपक्ष के पास 233 सांसद हैं। इस वजह से बिल पारित कराने के लिए विपक्ष के समर्थन या अनुपस्थिति की जरूरत थी।
राजनीतिक गणित बना अहम फैक्टर
विश्लेषकों के अनुसार, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके जैसे दलों की भूमिका इस बिल के लिए निर्णायक थी। कांग्रेस के 98 सांसद भी इस समीकरण में महत्वपूर्ण माने जा रहे थे। पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण बिल लोकसभा में ही अटक गया।
राज्यसभा का रास्ता भी हुआ बंद
लोकसभा में पारित न होने के कारण अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश नहीं किया जाएगा। राज्यसभा में भी एनडीए के पास 141 सदस्य हैं और दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सांसदों का समर्थन जरूरी होता।
क्षेत्रीय दलों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए बिल के मौजूदा स्वरूप पर चिंता जताई थी। उन्होंने अपने सांसदों से राज्य हितों को ध्यान में रखते हुए एकजुट रहने की अपील की।
यह घटनाक्रम देश की राजनीति में महिला आरक्षण के मुद्दे पर जारी मतभेदों को एक बार फिर सामने ले आया है, जिससे आने वाले समय में इस विषय पर नई रणनीति की जरूरत साफ नजर आ रही है।
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