भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा(Twisha Sharma Case) संदिग्ध मौत मामले में पीड़ित परिवार को अदालत से बड़ा झटका लगा है। जिला अदालत ने मृतका का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग को अस्वीकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि मध्य प्रदेश में ऐसी सुविधा वाले स्थान की जानकारी तत्काल उपलब्ध कराई जाए, जहां शव को माइनस 80 डिग्री तापमान पर सुरक्षित रखा जा सके। अदालत के इस फैसले के बाद मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है और परिवार अब भी निष्पक्ष जांच की उम्मीद लगाए बैठा है।
परिजनों ने पहले पोस्टमार्टम की प्रक्रिया और उसकी रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए दोबारा पोस्टमार्टम जरूरी है। परिवार को आशंका थी कि शुरुआती जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं मिल पाई है। इसी कारण उन्होंने अदालत से पुनः पोस्टमार्टम की अनुमति मांगी थी ताकि मामले की सच्चाई सामने आ सके।
अदालत ने नहीं स्वीकार की मांग
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने दोबारा पोस्टमार्टम की मांग को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट का मानना था कि मौजूदा परिस्थितियों में दूसरी पोस्टमार्टम प्रक्रिया की अनुमति देना उचित नहीं है। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि भविष्य में वैज्ञानिक जांच की आवश्यकता पड़ सकती है, इसलिए शव को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होगा। परिवार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर पांडे ने बताया कि उन्होंने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में पोस्टमार्टम कराने की मांग भी रखी थी।
उनका तर्क था कि किसी स्वतंत्र और विशेषज्ञ संस्थान में जांच होने से मामले के कई बिंदुओं पर स्पष्टता आ सकती है। लेकिन अदालत ने इस मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर का विषय है। हालांकि, अदालत ने पुलिस को अहम निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश में उपलब्ध उन सुविधाओं की जानकारी दी जाए जहां शव को अत्यंत कम तापमान पर लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, माइनस 80 डिग्री तापमान पर शव संरक्षित रहने से भविष्य में फॉरेंसिक या अन्य वैज्ञानिक परीक्षण किए जा सकते हैं। कोर्ट ने पुलिस से इस संबंध में जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
परिवार को कानूनी तौर पर बड़ा झटका
ट्विशा शर्मा की मौत का मामला पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में बना हुआ है। परिवार शुरू से ही निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग करता रहा है। परिजनों का कहना है कि उन्हें अभी तक कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं और वे चाहते हैं कि मामले की जांच पूरी गंभीरता से हो। दूसरी ओर, अदालत के फैसले के बाद परिवार को कानूनी तौर पर एक बड़ा झटका जरूर लगा है लेकिन शव को संरक्षित रखने के आदेश से जांच के संभावित विकल्प भविष्य के लिए खुले रह सकते हैं।
फिलहाल इस मामले पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर ट्विशा शर्मा की मौत किन परिस्थितियों में हुई और जांच एजेंसियां आगे क्या कदम उठाती हैं। परिवार अब भी उम्मीद कर रहा है कि आने वाले समय में जांच से ऐसे तथ्य सामने आएंगे जो इस रहस्यमयी मामले से पर्दा उठा सकें।