जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर से बुधवार को एक घटना हुई, जहां नियंत्रण रेखा (LoC) के नजदीक हुए एक धमाके में भारतीय सेना के दो जवान बलिदान हुए। यह हादसा बारामूला जिले के कमलकोट इलाके में हुआ। धमाके के बाद दोनों जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल श्रीनगर स्थित सेना के बेस अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके।
कमलकोट इलाके में हुआ हादसा
सेना और सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक घटना उरी सेक्टर के संवेदनशील कमलकोट क्षेत्र में हुई। जवान नियमित ड्यूटी पर तैनात थे, तभी अचानक विस्फोट हुआ। धमाका इतना जोरदार था कि दोनों सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के तुरंत बाद मौके पर तैनात अन्य जवानों ने राहत और बचाव अभियान शुरू किया और घायलों को हेलीकॉप्टर की मदद से श्रीनगर के बादामीबाग छावनी स्थित सेना के अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि इलाज के दौरान दोनों जवानों ने दम तोड़ दिया।
महाराष्ट्र के रहने वाले थे दोनों शहीद
शहीद जवानों की पहचान अर्जुन जाधव और विक्रम बालकृष्ण के रूप में हुई है। दोनों महाराष्ट्र के निवासी थे और भारतीय सेना की 8 राष्ट्रीय राइफल्स (RR) यूनिट से जुड़े हुए थे। उनकी शहादत की खबर मिलते ही सेना के अधिकारियों ने परिजनों को सूचना दी। दोनों जवानों के गांवों में शोक का माहौल है।
धमाके के वजह की जांच जारी
फिलहाल विस्फोट किस वजह से हुआ, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सेना ने मामले की जांच शुरू कर दी है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि धमाका किसी पुराने विस्फोटक, बारूदी सुरंग या किसी अन्य कारण से हुआ। उरी सेक्टर नियंत्रण रेखा के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक माना जाता है। बारामूला, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिलों से होकर गुजरने वाली करीब 740 किलोमीटर लंबी LoC पर सेना लगातार निगरानी रखती है। यह क्षेत्र अक्सर घुसपैठ की कोशिशों, सीमा पार से होने वाली गतिविधियों और सुरक्षा चुनौतियों के कारण चर्चा में रहता है। इसी वजह से यहां सेना की तैनाती और सतर्कता हमेशा उच्च स्तर पर रहती है।
ड्रोन और घुसपैठ की चुनौती बरकरार
हाल के वर्षों में सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थ भेजने की घटनाएं बढ़ी हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क ऐसे माध्यमों का इस्तेमाल कर जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकियों तक सामग्री पहुंचाने की कोशिश करते हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सेना और BSF ने सीमा क्षेत्रों में अत्याधुनिक निगरानी और एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात कर रखे हैं।
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