ईरान और अमेरिका के बीच हाल में हुए समझौते के बाद भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत आने वाले 11 जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य(Strait of Hormuz) को पार कर चुके हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के कारण वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही थी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवालl ने जानकारी दी कि वर्तमान में भारत के ध्वज वाले 10 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं। इसके अलावा दो अन्य भारतीय जहाज हाल ही में इस क्षेत्र में पहुंचे हैं। सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और शेष जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं।
किन सामानों को लेकर भारत आ रहे जहाज?
भारत की ओर बढ़ रहे जहाजों में ऊर्जा और कृषि क्षेत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण माल शामिल है। इनमें तीन भारतीय तेल टैंकर हैं जो बड़ी मात्रा में कच्चा तेल लेकर आ रहे हैं। इसके अलावा एक एलपीजी वाहक पोत, एक विदेशी ध्वज वाला तेल टैंकर तथा छह मालवाहक जहाज भी शामिल हैं जो उर्वरक सामग्री लेकर भारत पहुंच रहे हैं। इन जहाजों की आवाजाही से देश की ऊर्जा जरूरतों और कृषि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर और वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों से जोड़ता है। खाड़ी क्षेत्र के कई प्रमुख तेल उत्पादक देशों का निर्यात इसी मार्ग से होता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक तेल बाजार और आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा असर डालता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही भारत की ऊर्जा सुरक्षा, खाद आयात और व्यापारिक हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हालिया प्रगति से न केवल आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम हुई हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में स्थिरता लौटने के संकेत भी मिले हैं।