संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर चर्चा लगातार दूसरे दिन भी तेज रही। इस बहस के दौरान शशि थरूर(Shashi Tharoor) ने परिसीमन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए और इसे लेकर सरकार के रुख पर आपत्ति जताई। लोकसभा में विशेष सत्र के दौरान चर्चा में हिस्सा लेते हुए थरूर ने कहा कि परिसीमन की मौजूदा प्रक्रिया को लेकर जल्दबाजी दिखाई जा रही है।
उनके अनुसार, जो राज्य जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन कर चुके हैं, उन्हें कम प्रतिनिधित्व मिलने की स्थिति बन सकती है, जबकि अपेक्षाकृत अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को राजनीतिक बढ़त मिल सकती है। उन्होंने इसे “राजनीतिक असंतुलन” की दिशा में एक कदम बताया। थरूर ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ना सही नहीं है और इसे अलग से लागू किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इस तरह के अहम मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श जरूरी है।
‘लोकसभा का आकार बढ़ाना चिंता का विषय’
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि लोकसभा की सीटें बढ़ाकर लगभग 850 करने की योजना से संसदीय कार्यप्रणाली पर असर पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने राज्यसभा के आकार में किसी बदलाव का प्रस्ताव न होने को भी असंतुलन बताया। थरूर ने कहा कि परिसीमन के दौरान तीन प्रमुख संतुलनों पर ध्यान देना जरूरी है।
छोटे और बड़े राज्यों के बीच संतुलन, जनसंख्या नियंत्रण नीतियों वाले दक्षिणी राज्यों और उत्तरी राज्यों के बीच अंतर, और आर्थिक रूप से योगदान देने वाले राज्यों व केंद्र से अधिक फंड लेने वाले राज्यों के बीच संतुलन। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को कम राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना, नीति के लिहाज से एक “गलत संदेश” दे सकता है।