राजस्थान(Rajasthan) हाईकोर्ट ने एक बड़े फैसले में हत्या के अलग-अलग मामलों में सजा काट रहे दो बंदियों को विवाह की अनुमति प्रदान की है। अदालत का कहना है कि अगर दो बालिग व्यक्ति अपनी स्वतंत्र इच्छा से विवाह करना चाहते हैं तो यह उनके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार का हिस्सा है। इसी आधार पर जोधपुर के मंडोर ओपन एयर कैंप में रह रहे बंदी मुलाराम और फिलहाल पैरोल पर बाहर आई सजायाफ्ता सीमा को एक-दूसरे से शादी करने की अनुमति दी गई है।
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया है कि सभी निर्धारित नियमों और जरूरी सुरक्षा इंतजामों के साथ शादी समारोह शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित कराया जाए। अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि इस समारोह के दौरान जेल परिसर का अनुशासन और गरिमा हर हाल में बनी रहनी चाहिए।
दोनों ने अपनी इच्छा से किया शादी का फैसला
मुलाराम नागौर जिले के एडसिंगा गांव का निवासी है और वर्ष 2023 में हत्या सहित अन्य आरोपों में दोषी ठहराया गया था। अच्छे आचरण के आधार पर उसे मंडोर ओपन एयर कैंप में रखा गया है। दूसरी ओर, सीमा अपने पति की हत्या के मामले में सजा काट रही है और वर्तमान में पैरोल पर है। अदालत को दोनों ने बताया कि वे अपनी स्वेच्छा से विवाह करना चाहते हैं और इसे अपने सामाजिक पुनर्वास की दिशा में एक नई शुरुआत मानते हैं।
शादी समारोह के लिए बनाए गए खास नियम
राज्य सरकार ने भी अदालत के समक्ष बताया कि नियमानुसार विवाह कराने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि शादी में दोनों पक्षों की ओर से अधिकतम 21-21 परिजनों और एक पंडित को शामिल होने की अनुमति होगी। विशेष परिस्थितियों में जेल प्रशासन अतिरिक्त लोगों को भी अनुमति दे सकता है।
शादी की डेट पहले से प्रशासन को बताना जरूरी होगा और आयोजन का पूरा खर्च दोनों पक्ष खुद ही उठाएंगे। यह फैसला पुनर्वास, मानवीय दृष्टिकोण और संवैधानिक अधिकारों के संतुलन का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।