कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच एयर इंडिया ने अपने अंतरराष्ट्रीय परिचालन में कटौती का बड़ा फैसला लिया है। एयरलाइन ने आधिकारिक तौर पर कई इंटरनेशनल रूट्स पर उड़ानों की संख्या कम करने का ऐलान किया है। एयर इंडिया ने कहा है कि अगस्त 2026 तक वह हर महीने 1,200 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन जारी रखेगी। कंपनी के मुताबिक इसका उद्देश्य सीमित संसाधनों के बावजूद वैश्विक नेटवर्क को बनाए रखना है।
पांच महाद्वीपों में जारी रहेगा नेटवर्क
एयर इंडिया ने बताया कि उसका इंटरनेशनल नेटवर्क पांच महाद्वीपों तक सक्रिय रहेगा। हालांकि कुछ रूट्स पर फ्लाइट्स की संख्या को एडजस्ट किया गया है। एयरलाइन के अनुसार हर सप्ताह उत्तरी अमेरिका के लिए 33 फ्लाइट्स, यूरोप के लिए 47 फ्लाइट्स, यूनाइटेड किंगडम के लिए 57 फ्लाइट्स, ऑस्ट्रेलिया के लिए 8 फ्लाइट्स, सुदूर पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया और SAARC देशों के लिए 158 फ्लाइट्स और मॉरीशस के लिए 7 फ्लाइट्स का संचालन किया जाएगा।
PM मोदी की अपील के बाद बढ़ी चर्चा
एयर इंडिया का यह फैसला ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से विदेश यात्राएं कम करने और एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने वैश्विक आर्थिक संकट, पश्चिम एशिया तनाव और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव का हवाला देते हुए लोगों से खर्च में सावधानी बरतने की बात कही थी।
तेल की कीमतों ने बढ़ाई मुश्किलें
ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज स्ट्रेट संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। महंगे एविएशन फ्यूल की वजह से एयरलाइंस कंपनियों का परिचालन खर्च तेजी से बढ़ा है। इसका सीधा असर एयरलाइन कंपनियों के मुनाफे पर पड़ रहा है। हाल ही में एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट समेत कई कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र लिखकर हालात पर चिंता जताई थी। FIA ने कहा था कि एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से एविएशन सेक्टर भारी दबाव में है। एयरलाइंस ने चेतावनी दी थी कि अगर ईंधन की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं तो कई अंतरराष्ट्रीय रूट्स आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं रहेंगे और उड़ानों में कटौती करनी पड़ सकती है। अब एयर इंडिया द्वारा कई विदेशी रूट्स पर उड़ानों की संख्या कम करने के फैसले को उसी दबाव का असर माना जा रहा है।
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