Pakistan Lahore Rename: पाकिस्तान के लाहौर में दशकों बाद ऐतिहासिक पहचान को फिर से जिंदा करने की कोशिश शुरू हुई है। पंजाब प्रांत की CM मरियम नवाज ने शहर की 9 प्रमुख सड़कों, चौकों और इलाकों के इस्लामी नाम हटाकर उनके पुराने हिंदू और ब्रिटिश दौर के नाम बहाल कर दिए हैं। इनमें इस्लामपुरा को फिर से कृष्णनगर और बाबरी मस्जिद चौक को जैन मंदिर चौक नाम दिया गया है। प्रशासन ने नए बोर्ड भी लगा दिए हैं।
विरासत बचाने की पहल
अमृतसर से करीब 50 किलोमीटर दूर बसे इस ऐतिहासिक शहर में लंबे समय से इस्लामीकरण के तहत कई पुराने नाम बदल दिए गए थे। अब मरियम नवाज सरकार उन्हें उनकी ऐतिहासिक पहचान लौटाने की कोशिश कर रही है।
किन जगहों के बदले नाम
सरकारी फैसले के तहत इस्लामपुरा का नाम कृष्णनगर, सुन्नत नगर का संतनगर और मौलाना जफर चौक का नाम फिर से लक्ष्मी चौक कर दिया गया है। इसी तरह बाबरी मस्जिद चौक अब जैन मंदिर चौक कहलाएगा। मुस्तफाबाद का नाम धर्मपुरा, सर आगा खान चौक का डेविस रोड, अल्लामा इकबाल रोड का जेल रोड और फातिमा जिन्ना रोड का नाम क्वींस रोड बहाल किया गया है। बाग-ए-जिन्ना को भी पुराने नाम लॉरेंस रोड से पहचाना जाएगा।
लोगों ने फैसले का किया स्वागत
लाहौर की बीकनहाउस यूनिवर्सिटी के लेक्चरर साद मलिक ने इस फैसले को सही बताया। उनका कहना है कि वे हमेशा लक्ष्मी चौक ही बोलते आए हैं, क्योंकि उनके पिता भी इसी नाम का इस्तेमाल करते थे। साद के मुताबिक, लक्ष्मी चौक सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि लाहौर की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।
जैन मंदिर चौक पर क्या बोले मौलाना?
अनारकली इलाके के मौलाना वाजिद कादरी का कहना है कि इस्लाम को किसी मंदिर या गुरुद्वारे के नाम से कोई परेशानी नहीं है। उनके मुताबिक, 1990 के दशक में राजनीतिक माहौल के चलते जैन मंदिर चौक का नाम बदलकर बाबरी मस्जिद चौक रखा गया था, लेकिन स्थानीय लोग आज भी इसे पुराने नाम से ही पहचानते हैं। उन्होंने कहा कि जिन मुस्लिम पूर्वजों ने ये नाम रखे थे, उनके ईमान पर कभी सवाल नहीं उठा।
नवाज शरीफ और मरियम का विजन
इस बदलाव की शुरुआत 19 मार्च को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद हुई, जिसमें लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल प्रोजेक्ट पर चर्चा की गई। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा कि यूरोप अपने ऐतिहासिक नामों और विरासत को सहेजकर रखता है, इसलिए लाहौर के पुराने नाम भी इतिहास के तौर पर सुरक्षित रहने चाहिए। वहीं पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम का कहना है कि लाहौर की पहचान उसकी पुरानी इमारतों और ऐतिहासिक नामों से ही बनती है।
कट्टरपंथियों का नहीं दिखा विरोध
आमतौर पर पाकिस्तान में ऐसे मुद्दों पर कट्टरपंथी संगठन विरोध करते रहे हैं, लेकिन इस बार कोई बड़ा विरोध सामने नहीं आया। तहरीक-लब्बैक-पाकिस्तान (TLP) पर पहले से प्रतिबंध होने के कारण माहौल शांत रहा। वहीं लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों ने भी इस फैसले के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया।
बाबरी मस्जिद विवाद के बाद बदले थे नाम
लाहौर में नाम बदलने की शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी, जब भारत में बाबरी मस्जिद ढांचा गिराए जाने के बाद पाकिस्तान में कई इलाकों के हिंदू और ब्रिटिश दौर के नाम बदल दिए गए थे। उस समय नवाज शरीफ, बेनजीर भुट्टो और बाद में परवेज मुशर्रफ की सरकारें रहीं। हालांकि इमरान खान के कार्यकाल में इस तरह की नाम बदलने की प्रक्रिया नहीं चली।
दूसरे चरण की भी तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, अब दूसरे चरण में पाकिस्तान के सिंध और खैबर पख्तूनख्वाह प्रांतों में भी पुराने ऐतिहासिक नाम बहाल किए जा सकते हैं। इसे पाकिस्तान में सांस्कृतिक विरासत को बचाने की बड़ी पहल माना जा रहा है।
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