ओडिशा में क्लास 5 की इंग्लिश की किताब में छपाई की एक बड़ी गलती सामने आई है। इसमें एक राजस्थानी लोक गीत के बोल छापे गए, जो एक मशहूर बॉलीवुड गाना भी है। किताब के एक चैप्टर में ‘निंबूडा निंबूडा’ गाना छापा गया, जिससे किताब के एडिटोरियल और क्वालिटी-चेक प्रोसेस पर सवाल उठ रहे हैं।
यह गाना असल में एक राजस्थानी लोक गीत है, जिसे 1999 की फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ में ऐश्वर्या राय पर फिल्माया गया था। बताया जा रहा है कि पब्लिशिंग या छपाई की गलती की वजह से यह गाना किताब में आ गया।
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5वीं के बच्चे पढ़ रहे हैं ऐश्वर्या राय का हिट गाना, स्कूल की किताब में छापा 'निंबूड़ा-निंबूड़ा' सॉन्ग – aishwarya rai bollywood hit song nimbooda nimbooda lyrics published in class 5 textbook in odisha – Navbharat Times https://t.co/rbhs84OesC— आप की आवाज LIVE STREAM (@TheRoyalProper1) June 29, 2026
इस घटना पर ऑनलाइन कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ यूज़र्स ने मज़ाक और मीम्स के ज़रिए अपनी बात कही, तो कुछ ने प्रूफरीडिंग की कमी की आलोचना की और स्कूल की किताबें तैयार करने में ज़्यादा जवाबदेही की मांग की।
कई लोगों ने सवाल उठाया कि किताबें छपने और बंटने से पहले कई लेवल की समीक्षा के बावजूद इतनी बड़ी गलती कैसे रह गई। एक यूज़र ने लिखा, “बच्चों की पढ़ाई की किताब में ऐसी बड़ी गलती पर यकीन नहीं होता। हमें इस बारे में सच में गंभीर होने की ज़रूरत है क्योंकि बच्चे आज जो सीखेंगे, वही देश का भविष्य होगा।” एक और यूज़र ने लिखा, किस आधार पर इन किताबों को मंज़ूरी दी गई? पब्लिकेशन से पहले रिव्यू कमेटी कहाँ थी?”
एक और X यूज़र ने लिखा, “सरकार होने का दावा करने वाली अधूरी तैयारी वाली सरकार ओडिया गौरव को खत्म कर रही है, यह पूरे ओडिशा में बर्बादी का सिलसिला है। एक-दो गलतियाँ तो बर्दाश्त की जा सकती हैं, लेकिन यहाँ 2100 से ज़्यादा गलतियाँ हैं, अगर आप ढूंढेंगे तो और भी मिलेंगी।”
मुंबई नॉर्थ सेंट्रल की सांसद और मुंबई रीजनल कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष वर्षा एकनाथ गायकवाड़ ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने आधिकारिक X हैंडल पर लिखा, “इससे मुझे उस छात्र के बारे में मशहूर चुटकुला याद आता है जिसने परीक्षा के लिए पढ़ाई नहीं की थी और आंसर शीट में फिल्म ‘शोले’ की कहानी लिख दी थी।
अब तक, ओडिशा स्कूल और मास एजुकेशन डिपार्टमेंट ने इस मामले पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, इस घटना के बाद शिक्षाविदों ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि पाठ्यपुस्तकों, खासकर कम उम्र के छात्रों के लिए बनी किताबों की अच्छी तरह से जांच-पड़ताल होनी चाहिए, ताकि उनमें दी गई जानकारी सही हो और शैक्षणिक मानकों को बनाए रखा जा सके।
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