अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में ईरान के सभी बड़े नेता मौजूद थे और अगर अमेरिका चाहता, तो एक ही हमले में उन सभी को निशाना बना सकता था। हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए नहीं किया गया क्योंकि “फिर बातचीत करने के लिए कोई नहीं बचता।” ट्रंप ने शोक मनाने वालों पर भी तंज कसा और कहा कि उनके आंसू “नकली” हो सकते हैं।
ट्रंप के बयान पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी। आर्मेनिया में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर लिखा, “लोगों को मारा जा सकता है, लेकिन विचारों को नहीं। न तो आपमें सभ्यता है, न इतिहास और न ही सम्मान। इस बीच, अयातुल्ला अली खामेनेई को आखिरी विदाई देने के लिए लगातार तीसरे दिन तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसाला में लाखों लोग जमा हुए। अंतिम संस्कार के दौरान “अमेरिका मुर्दाबाद” और “इजरायल मुर्दाबाद” के नारे लगाए गए।
पिछले 24 घंटों की 5 बड़ी बातें
100 से ज़्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल: खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में 100 से ज़्यादा देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
तेहरान में कड़ी सुरक्षा: सेना और पुलिस की भारी तैनाती की गई। मेट्रो और सरकारी बस सेवाएँ मुफ़्त थीं, होटलों ने 50% तक की छूट दी और 5,000 से ज़्यादा स्कूलों में ठहरने की व्यवस्था की गई।
अंतिम संस्कार का जुलूस 5 शहरों से गुजरेगा: तेहरान से शुरू होकर, यह जुलूस कोम और इराक के कर्बला और नजफ़ से होते हुए 9 जुलाई को मशहद पहुँचेगा, जहाँ दफ़नाने की प्रक्रिया होगी।
अमेरिका के साथ बातचीत फ़िलहाल रुकी हुई: ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत रोक दी है। उसने इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) को फोर्डो, नतांज़ और इस्फ़हान में परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया।
ट्रंप का एक और दावा: ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने मानवीय आधार पर ईरान को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक हफ़्ते का समय दिया था। उनके अनुसार, इसके बाद ईरान को अमेरिका की शर्तें माननी होंगी।

