London में ईरानी दूतावास पर चढ़ा युवक, फहराया मुस्लिम क्रांति से पहले का झंडा, डॉनल्ड ट्रंप ने किया ट्वीट
सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें एक जवान आदमी लंदन में ईरानी दूतावास की बालकनी पर चढ़कर देश का आधिकारिक झंडा उतारता है और उसकी जगह शेर और सूरज के निशान वाला झंडा लगा देता है, जिसका इस्तेमाल 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले किया जाता था।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक युवक को लंदन स्थित ईरानी दूतावास की बालकनी पर चढ़ते हुए देखा जा सकता है, जहां वह ईरान का मौजूदा आधिकारिक झंडा उतारकर उसकी जगह 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले इस्तेमाल होने वाला शेर और सूरज का प्रतीकयुक्त झंडा फहरा देता है। युवक की इस कार्रवाई पर दूतावास के बाहर मौजूद भीड़ तालियों और नारों के साथ जोरदार समर्थन जताती सुनाई देती है।
ऊंची इमारत पर कैसे चढ़ा युवक ?
वीडियो फुटेज के अनुसार यह घटना शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 की है। प्रदर्शनकारी युवक लंदन के केंसिंग्टन इलाके में स्थित ईरानी दूतावास की इमारत के सामने से खिड़कियों और खंभों के सहारे ऊपर चढ़ता है और बालकनी तक पहुंच जाता है। इसके बाद वह छत पर लगे इस्लामी गणराज्य के झंडे को नीचे उतारता है और उसकी जगह ईरान की राजशाही से जुड़े ऐतिहासिक प्रतीक वाला झंडा फहरा देता है।
इस घटना के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दो लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार, एक व्यक्ति को एग्रेवेटेड ट्रेसपास और एक आपातकालीन कर्मी पर हमला करने के संदेह में गिरफ्तार किया गया है, जबकि दूसरे व्यक्ति को एग्रेवेटेड ट्रेसपास के आरोप में पकड़ा गया है इसके अलावा इस मामले में एक तीसरे व्यक्ति की तलाश जारी है। वहीं पुलिस को यह साफ नहीं हो पाया है कि दूतावास से झंडा उतारने वाला युवक गिरफ्तार किए गए लोगों में शामिल है या नहीं।
ट्रंप ने किया ट्वीट
लंदन में हुई यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब ईरान पिछले कई वर्षों की सबसे गंभीर आंतरिक अशांति से गुजर रहा है। ऐसे में सोशल मीडिया पर सामने आए इस वीडियो ने मामले को हवा देने का काम किया है। इसी को लेकर डॉनल्ड ट्रंप का ट्वीट भी सामने आया है।
28 दिसंबर 2025 को आर्थिक समस्याओं को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब देश के कई हिस्सों में फैल चुके हैं। ये आंदोलन धीरे-धीरे धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ खुली चुनौती का रूप ले चुके हैं, जिसका असर अब ईरान की सीमाओं के बाहर भी दिखाई देने लगा है।
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