भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने पाँच नए जजों की नियुक्ति को मंज़ूरी दे दी है। इन नए नियुक्त जजों में चार हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस और एक सीनियर एडवोकेट शामिल हैं।
शील नागू (चीफ जस्टिस-CJ, पंजाब और हरियाणा HC), श्री चंद्रशेखर (CJ, बॉम्बे HC), संजीव सचदेवा (CJ, मध्य प्रदेश HC), अरुण पल्ली (CJ, J&K और लद्दाख HC) और सीनियर वकील वेंकिता सुब्रमणि मोहना को भारत के सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया। pic.twitter.com/f5EQK2wpwL
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 1, 2026
जिन लोगों को नियुक्त किया गया है, उनमें जस्टिस शील नागू (चीफ़ जस्टिस, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट), जस्टिस चंद्रशेखर (चीफ़ जस्टिस, बॉम्बे हाई कोर्ट), जस्टिस संजीव सचदेवा (चीफ़ जस्टिस, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट), जस्टिस अरुण पल्ली (चीफ़ जस्टिस, J&K और लद्दाख हाई Court), और सीनियर एडवोकेट वेंकटरमणी सुब्रमणि मोहना शामिल हैं।
इन नियुक्तियों से उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया और तेज़ होगी। इन नामों का चयन न्यायपालिका के भीतर अनुभव और विशेषज्ञता को ध्यान में रखकर किया गया है।
न्यायिक अनुभव का लाभ
नए नियुक्त जजों में शील नागू, संजीव सचदेवा, अरुण पल्ली और जी.एस. चंद्रशेखर ने विभिन्न हाई कोर्ट में लंबे समय तक न्यायिक सेवा दी है। वहीं, सीनियर एडवोकेट वेंकटरमणी सुब्रमणि मोहना संवैधानिक और कानूनी मामलों में अपने व्यापक अनुभव के लिए जाने जाते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियुक्तियों से सुप्रीम कोर्ट को विविध प्रकार के न्यायिक अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा, जिससे महत्वपूर्ण संवैधानिक, प्रशासनिक और जनहित के मामलों का निपटारा अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट की क्षमता को मज़बूत करना
सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति लंबे समय से चर्चा का विषय रही है, क्योंकि कोर्ट में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। इन नए जजों के शामिल होने से कोर्ट की कार्यक्षमता में सुधार होने की उम्मीद है, जिससे मामलों के त्वरित निपटारे में मदद मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 37
शीर्ष अदालत में जजों की कुल संख्या अब बढ़कर 37 हो जाएगी। यह आंकड़ा स्वीकृत संख्या 38 से सिर्फ़ एक कम है। पिछले महीने, सरकार ने एक कानून में संशोधन के लिए एक अध्यादेश जारी किया था, जिससे शीर्ष अदालत में जजों की स्वीकृत संख्या भारत के चीफ़ जस्टिस सहित 34 से बढ़कर 38 हो गई थी। इन नियुक्तियों से पहले, कोर्ट में दो पद पहले से ही खाली थे। स्वीकृत संख्या में वृद्धि के बाद शीर्ष अदालत में खाली पदों की कुल संख्या बढ़कर छह हो गई थी। सोमवार को की गई पाँच नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में एक पद रिक्त रह जाएगा। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 27 मई को इन पाँच नामों की सिफारिश की थी, और ये नियुक्तियाँ मात्र चार दिनों के भीतर कर दी गईं।

