उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ धाम की यात्रा(Kedarnath Yatra 2026) इस वर्ष तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है। अब तक तीन लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं। हालांकि बढ़ती भीड़ के साथ प्रशासन के सामने व्यवस्थाओं को संभालने की चुनौती भी लगातार बढ़ती जा रही है।
इसी स्थिति को देखते हुए सोमवार को गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडेय और आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने रुद्रप्रयाग पहुंचकर जिला कार्यालय में यात्रा व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि अब तक 3 लाख से अधिक यात्री केदारनाथ पहुंच चुके हैं।
यात्रा में बढ़ती भीड़
यात्रा मार्ग पर अब तक 31 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सहायता की जरूरत पड़ी है, जिससे ऊंचाई और कठिन चढ़ाई की चुनौती का अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं, 11 हजार से अधिक यात्री हेलीकॉप्टर सेवा से धाम पहुंचे हैं। बड़ी संख्या में लोग घोड़े-खच्चर और डंडी-कंडी के सहारे भी यात्रा पूरी कर रहे हैं। प्रशासन ने 8 हजार से अधिक घोड़े-खच्चरों का पंजीकरण और बीमा सुनिश्चित किया है, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों पर कार्रवाई करते हुए कुछ को सूची से बाहर किया जा रहा है।
प्रशासन की स्वच्छता पर सख्ती
आयुक्त ने साफ कहा कि यात्रा मार्ग पर स्वच्छता में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। 18 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर सफाईकर्मी और पर्यावरण मित्र लगातार तैनात रहेंगे। साथ ही सेक्टर मजिस्ट्रेट समय-समय पर निरीक्षण करेंगे ताकि व्यवस्थाओं में कोई ढिलाई न रहे। गौरीकुंड क्षेत्र में यात्रियों की सुविधा के लिए महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग चेंजिंग रूम भी बनाए गए हैं।
रात की यात्रा पर रोक
यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है कि रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक यात्रा मार्ग पूरी तरह बंद रहेगा। इस दौरान केवल आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही की अनुमति होगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
इसके अलावा स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी भी स्थिति में VIP दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी और सभी श्रद्धालुओं को समान रूप से दर्शन का अवसर मिलेगा। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए धाम क्षेत्र में फायर ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अग्निशमन उपकरणों के लिए रुद्रप्रयाग पुलिस को अतिरिक्त बजट भी उपलब्ध कराया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।