महाराष्ट्र के नांदेड़ शहर में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने शहर के एक मेडिकल स्टोर(Nanded Medical Store) पर छापेमारी कर कई अनियमितताओं का खुलासा किया है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर प्रशासन ने संबंधित मेडिकल स्टोर को अगली कार्रवाई तक बंद कर दिया है। यह कार्रवाई एक नागरिक द्वारा की गई शिकायत के बाद की गई, जिसने दवा की गुणवत्ता और वैधता पर सवाल उठाए थे।
जानकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति अपने 90 वर्षीय मधुमेह पीड़ित पिता के लिए नियमित दवाएं खरीदकर लाया था। बाद में जब उसने दवाओं की जांच की तो पता चला कि उनमें से कुछ दवाओं की वैधता अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी थी। यह देखकर परिवार चिंतित हो गया और मामले की जानकारी संबंधित विभाग को दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि दवाओं की एक्सपायरी डेट बीत जाने के बावजूद उन्हें ग्राहकों को बेचा जा रहा था जो सीधे तौर पर मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की शिकायत FDA अधिकारियों से की।
FDA छोपेमारी में हुए खुलासे
शिकायत मिलने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने सोमवार को शहर के डॉक्टर्स लेन क्षेत्र स्थित मेडिकल स्टोर पर अचानक निरीक्षण किया। जांच के दौरान टीम ने दुकान से कई दवाओं के नमूने अपने कब्जे में लिए और दस्तावेजों की भी जांच की।
अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिक जांच में यह सामने आया कि कुछ दवाएं बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के बेची जा रही थीं। इसके अलावा निरीक्षण के समय दुकान पर कोई पंजीकृत फार्मासिस्ट मौजूद नहीं था जबकि नियमानुसार मेडिकल स्टोर के संचालन के दौरान फार्मासिस्ट की उपस्थिति अनिवार्य होती है।
ग्राहकों को नहीं दिए जा रहे थे बिल
जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि दवा खरीदने वाले ग्राहकों को नियमित रूप से बिल उपलब्ध नहीं कराए जा रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि बिल न मिलने की स्थिति में ग्राहक के पास खरीद का कोई प्रमाण नहीं रहता जिससे भविष्य में शिकायत या कानूनी कार्रवाई करना कठिन हो जाता है। FDA अधिकारियों ने इस अनियमितता को भी गंभीरता से लिया है और संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
आगे की जांच जारी
FDA अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच पूरी होने तक मेडिकल स्टोर को बंद रखा जाएगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित संचालक के खिलाफ दवा एवं औषधि नियमों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
यह मामला एक बार फिर दवा विक्रेताओं की जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को केंद्र में ले आया है। साथ ही यह भी संदेश देता है कि दवा खरीदते समय ग्राहकों को एक्सपायरी डेट और बिल जैसी महत्वपूर्ण चीजों की जांच अवश्य करनी चाहिए।