Iran America Talks: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता को रोक दिया है। ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के साथ हो रहे संदेशों के आदान-प्रदान को निलंबित कर दिया है। इस कदम से 8 अप्रैल से लागू संघर्षविराम पर खतरा बढ़ गया है और क्षेत्र में दोबारा सैन्य टकराव की आशंका तेज हो गई है।
लेबनान पर हमलों को लेकर बढ़ा विवाद
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने यह फैसला इजरायल द्वारा लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई के विरोध में लिया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि लेबनान में शांति बनाए रखना युद्धविराम की प्रमुख शर्तों में शामिल था, लेकिन इजरायल ने लगातार हमले कर समझौते की भावना का उल्लंघन किया है। इसी वजह से ईरानी वार्ताकारों ने अमेरिका के साथ चल रहे संपर्क को रोकने का निर्णय लिया है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बढ़ी चिंता
ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट में फिर से सख्ती बरतने के संकेत दिए गए हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। यदि यहां गतिविधियों पर असर पड़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल आपूर्ति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
विदेश मंत्री अराघची ने जताई नाराजगी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लेबनान में हो रहे हमलों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच हुआ संघर्षविराम सभी मोर्चों पर लागू माना जाएगा और किसी भी क्षेत्र में उसका उल्लंघन पूरे समझौते के उल्लंघन के समान होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे किसी भी घटना के परिणामों के लिए अमेरिका और इजरायल जिम्मेदार होंगे।
फरवरी में शुरू हुआ था संघर्ष
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-इजरायल गठबंधन और ईरान के बीच संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था। हवाई हमलों के बाद शुरू हुई इस लड़ाई ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया था। इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री गतिविधियां प्रभावित हुईं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ गई थी।
8 अप्रैल को हुआ था संघर्षविराम
लगातार तनाव के बाद 8 अप्रैल को दोनों पक्ष अस्थायी संघर्षविराम पर सहमत हुए थे। इसके बाद तनाव कम करने और स्थायी समाधान तलाशने के लिए कई स्तरों पर बातचीत की कोशिशें शुरू हुईं। पाकिस्तान में भी दोनों पक्षों के बीच चर्चा हुई थी और बाद में मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी रहा। अब ईरान द्वारा इस प्रक्रिया को रोकने से कूटनीतिक प्रयासों को झटका लगा है।
फिर बढ़ सकता है सैन्य टकराव
हालांकि संघर्षविराम अभी भी प्रभावी माना जा रहा है, लेकिन दोनों पक्ष अपनी -अपनी बात पर कायम हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखने की बात कह चुके हैं। वहीं ईरान ने भी किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहने का संकेत दिया है। ऐसे में वार्ता रुकने और लेबनान को लेकर बढ़े विवाद ने क्षेत्र में एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की आशंका को मजबूत कर दिया है।
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