सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) ने उत्तराखंड कैडर के वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी(Sanjeev Chaturvedi) की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) से जुड़े मामले में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। चतुर्वेदी वर्तमान में हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड फॉरेस्ट्री ट्रेनिंग एकेडमी (UFTA) के निदेशक पद पर तैनात हैं।
मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 की ACR ग्रेडिंग में बदलाव से जुड़ा है। चतुर्वेदी ने ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उनकी रेटिंग को बिना पर्याप्त कारण के 9.74 से घटाकर 9.30 कर दिया गया। इस मामले में CAT ने उत्तराखंड के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (फॉरेस्ट), मुख्य सचिव और प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (PCCF) को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए छह सप्ताह का समय दिया गया है।
अधिकारी ने लगाए आरोप
सुनवाई के दौरान चतुर्वेदी ने दावा किया कि ACR में की गई कटौती सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बल्कि उनके द्वारा उठाए गए भ्रष्टाचार के मुद्दों से जुड़ी कार्रवाई है। उनका आरोप है कि पिछले समय में उन्होंने विभागीय अनियमितताओं और कथित घोटालों की जांच कराई थी जिसके बाद उनकी रिपोर्ट में बदलाव किया गया।
उन्होंने अपनी याचिका में पूर्व रिपोर्टिंग अधिकारी की टिप्पणियों का भी उल्लेख किया, जिसमें उनके काम को ईमानदारी, नवाचार और बेहतर प्रशासन से जोड़ा गया था। उनके अनुसार, वन प्रबंधन में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग, जैव विविधता संरक्षण और मुनस्यारी में राज्य के पहले बुरांश गार्डन की पहल के लिए उन्हें सराहा गया था।
मुनस्यारी इको-हट प्रोजेक्ट की जांच से जुड़ा विवाद
याचिका में चतुर्वेदी ने दिसंबर 2024 में मुनस्यारी क्षेत्र में इको-हट निर्माण कार्य से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच रिपोर्ट का भी जिक्र किया है। उनके अनुसार, जांच में निर्माण सामग्री की खरीद प्रक्रिया और भुगतान से संबंधित कुछ गंभीर सवाल सामने आए थे। चतुर्वेदी का दावा है कि उन्होंने इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों से जांच की सिफारिश की थी। उनका आरोप है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने के कारण ही उनकी ACR रेटिंग प्रभावित की गई।
CAT के नोटिस के बाद अब उत्तराखंड सरकार के संबंधित अधिकारियों को अपना जवाब पेश करना होगा। मामले की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि ACR में बदलाव के पीछे प्रशासनिक कारण थे या फिर अधिकारी द्वारा लगाए गए आरोपों में कोई आधार है। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और अधिकारियों की मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर चर्चा में बना हुआ है।