Haryana Bank Fraud: हरियाणा में सामने आए 590 करोड़ रुपये के बड़े बैंकिंग घोटाले ने प्रशासनिक और बैंकिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य सरकार ने इस मामले में सख्त कदम उठाते हुए वरिष्ठ अधिकारी अमित दीवान को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह घोटाला हरियाणा पावर सेक्टर की कंपनी Haryana Power Generation Corporation Limited से जुड़ा है, जिसमें सरकारी धन को फर्जी खातों के जरिए डायवर्ट किया गया।
मुख्य आरोपी पर कार्रवाई
इस मामले के मुख्य आरोपी अमित दीवान, जो Uttar Haryana Bijli Vitran Nigam Limited में चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) के पद पर तैनात थे, को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया। 1 मई 2026 को जारी आधिकारिक आदेश में उन पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों का उल्लेख किया गया है। इससे पहले उन्हें निलंबित किया गया था, लेकिन जांच में ठोस सबूत मिलने के बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।
अमित दीवान गिरफ्तार
अमित दीवान को 18 मार्च 2026 को राज्य विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो ने गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि इस घोटाले को अंजाम देने के लिए फर्जी बैंकिंग ट्रांजेक्शन और शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। यह रकम एचपीजीसीएल के उन खातों से निकाली गई, जो IDFC First Bank और AU Small Finance Bank में संचालित थे।
शेल कंपनियों ने बिछाया जाल
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे घोटाले के लिए कई फर्जी कंपनियां बनाई गई थीं। इन कंपनियों के खातों में धीरे-धीरे सरकारी धन ट्रांसफर किया गया। यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें कई लोगों की भूमिका सामने आई है। अब तक इस मामले में कुल 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें अमित दीवान 15वें आरोपी हैं।
वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका पर उठे सवाल
अमित दीवान का प्रोफाइल भी काफी अहम रहा है। वे पावर सेक्टर में 27 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत थे और वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ माने जाते थे। घोटाले के समय वे एचपीजीसीएल में डायरेक्टर (फाइनेंस) के पद पर थे और बाद में उन्हें यूएचबीवीएनएल में CFO बनाया गया था। इतने वरिष्ठ पद पर रहते हुए इस तरह के आरोप सामने आना पूरे सिस्टम के लिए चिंता का विषय है।
CBI को सौंपी गई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने जांच Central Bureau of Investigation को सौंप दी है। अधिकारियों का मानना है कि यह घोटाला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई स्तरों पर मिलीभगत हो सकती है। सीबीआई अब बैंकिंग लेन-देन, शेल कंपनियों और अन्य संदिग्धों की भूमिका की गहराई से जांच करेगी। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह घोटाला न सिर्फ सरकारी तंत्र बल्कि बैंकिंग सुरक्षा प्रणाली के लिए भी एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है।
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