गुजरात(Gujarat) आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) की जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) युवाओं तक अपनी पहुंच बनाने के लिए इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहा था। जांच के अनुसार, अब आतंकवादी संगठन केवल सीमा पार से घुसपैठ पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए स्थानीय युवाओं से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच में ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि मॉड्यूल के सदस्य कथित तौर पर पाकिस्तान में बैठे संचालकों के संपर्क में थे।
ATS के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद अमीन शेरा इस नेटवर्क में कथित रूप से युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रभावित करने की भूमिका निभा रहा था। आरोप है कि वह अन्य सदस्यों तक मसूद अजहर के भाषण, वीडियो और कट्टरपंथी विचारों से जुड़ी सामग्री भेजता था, ताकि उनकी सोच को प्रभावित किया जा सके।
43 डिजिटल ई-बुक्स बरामद होने का दावा
जांच के दौरान आरोपियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जिहाद से संबंधित 43 डिजिटल ई-बुक्स (PDF) और ‘अकेला मुजाहिद जेहाद कैसे करे’ नामक पुस्तक के कुछ पन्ने भी बरामद होने का दावा किया गया है। एजेंसियों के मुताबिक, इस तरह की सामग्री का इस्तेमाल युवाओं, खासकर धार्मिक शिक्षा प्राप्त कर रहे कुछ छात्रों को प्रभावित करने और उन्हें कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों की ओर प्रेरित करने के लिए किया जा रहा था।
Gen-Z युवाओं पर फोकस
गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) की जांच के अनुसार, इस मॉड्यूल का मुख्य निशाना 18 से 25 वर्ष के युवा थे जिन्हें आमतौर पर Gen-Z कहा जाता है। जांच में सामने आया कि गिरफ्तार किए गए 13 आरोपियों में से 10 की उम्र 18 से 24 वर्ष के बीच है। एजेंसियों का मानना है कि युवाओं को इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रभावित कर कट्टरपंथ की ओर ले जाने की कोशिश की जा रही थी। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, संगठन का कथित उद्देश्य ऐसे लोगों को तैयार करना था जो किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा बने बिना अकेले ही हिंसक घटनाओं को अंजाम दे सकें।
इसी रणनीति के तहत कथित तौर पर कुछ डिजिटल सामग्री और किताबों का इस्तेमाल किया जा रहा था जिनमें अकेले हमला करने के तरीकों का उल्लेख मिलता है। ATS के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आरोपी 2023 से विस्फोटक और IED तैयार करने के तरीके सीख रहे थे। आरोप है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान उन्होंने टाइमर आधारित विस्फोटक उपकरणों का परीक्षण करने के लिए अलग-अलग स्थानों पर कई ट्रायल किए। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन प्रयोगों में इस्तेमाल होने वाला सामान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और स्थानीय बाजार से खरीदा गया था।
गुजरात तक सीमित नहीं था नेटवर्क
जांच में मिले सुराग बताते हैं कि इस मॉड्यूल की गतिविधियां केवल गुजरात तक सीमित नहीं थीं। ATS के अनुसार, गिरफ्तार किए गए शुरुआती आठ आरोपियों में से दो आरोपी जम्मू-कश्मीर जाकर हथियार चलाने का प्रशिक्षण लेने के आरोप में जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा, जांच में यह भी सामने आया कि उन्हें कथित तौर पर कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस से जुड़े तरीकों की जानकारी भी दी गई थी। एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क अलग-अलग राज्यों तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा था।
ATS को जांच में क्या मिला?
ATS की साइबर और ग्राउंड इंटेलिजेंस टीमों ने संयुक्त कार्रवाई के दौरान कई अहम डिजिटल और भौतिक साक्ष्य जुटाए। तलाशी के दौरान जैश-ए-मोहम्मद का झंडा, IED बनाने से जुड़ा सामान, मसूद अजहर के नाम से जुड़े कथित पत्राचार और लगभग 1.30 लाख रुपये नकद बरामद होने का दावा किया गया है। जांच की शुरुआत में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
बाद में पूछताछ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पांच और लोगों को हिरासत में लिया गया। अदालत में पेशी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। कोर्ट ने हाल ही में गिरफ्तार पांच आरोपियों को आठ दिन की पुलिस रिमांड, जबकि पहले गिरफ्तार पांच अन्य आरोपियों को सात दिन की अतिरिक्त रिमांड पर भेजा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।