भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर(S. Jaishankar) रविवार से कई देशों के महत्वपूर्ण दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस यात्रा का पहला चरण पश्चिम एशिया के चार प्रमुख देशों – कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान से शुरू होगा। इस दौरान वे इन देशों के विदेश मंत्रियों और कई बड़े नेताओं के साथ द्विपक्षीय संबंधों, ऊर्जा सहयोग, व्यापार और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर चर्चा करेंगे। इन देशों का भारत के लिए महत्व है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं और ऊर्जा आपूर्ति में भी इनकी अहम भूमिका देखी गई है।
हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे गए तनाकसी के माहौल को देखते हुए भारत ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने पर खास ध्यान दे रहा है। ऐसे समय में यह दौरा ऊर्जा, निवेश और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कई अहम बैठकों का बनेंगे हिस्सा
पश्चिम एशिया की यात्रा के बाद विदेश मंत्री अमेरिका पहुंचेंगे। न्यूयॉर्क में वे 13 जुलाई को वर्ष 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के भारत के अभियान की औपचारिक शुरुआत करेंगे। इसके बाद 14 और 15 जुलाई को वे बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में भारत-यूरोपीय संघ ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) की तीसरी मंत्री स्तरीय बैठक में भाग लेंगे। इस दौरान यूरोपीय संघ और बेल्जियम के वरिष्ठ नेताओं के साथ व्यापार, तकनीक और रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा होगी।
कैरिबियाई देशों के साथ भी मजबूत हुए संबंध
इस दौरे से पहले डॉ. जयशंकर ने त्रिनिदाद और टोबैगो की यात्रा पूरी की जहां दोनों देशों के बीच पर्यटन, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, सौर ऊर्जा और आयुर्वेद के साथ आठ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। उन्होंने वहां के प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ मुलाकात कर द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, क्षमता निर्माण और प्रवासी भारतीयों से जुड़े विषयों पर भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।