Delhi Gymkhana Club Dispute: राजधानी दिल्ली के 113 साल पुराने दिल्ली जिमखाना क्लब पर करीब 48 करोड़ रुपये के बकाया ग्राउंड रेंट का मामला अब गंभीर होता जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से क्लब प्रबंधन को पिछले साल सितंबर से अब तक तीन नोटिस भेजे जा चुके हैं। मामला तब और चर्चा में आया, जब 22 मई को बेदखली आदेश जारी होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद क्लब की देखरेख कर रही जनरल कमेटी ने सोमवार को केंद्र सरकार से अपील की कि संस्था के कामकाज में किसी तरह की रुकावट न डाली जाए।
L&DO ने कई बार मांगा बकाया भुगतान
सूत्रों के मुताबिक, लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने सितंबर 2025, मार्च 2026 और अप्रैल 2026 में नोटिस जारी कर क्लब से बकाया ग्राउंड रेंट जमा करने को कहा था। अप्रैल में भेजे गए आखिरी नोटिस में साफ चेतावनी दी गई थी कि यदि एक सप्ताह के भीतर भुगतान नहीं हुआ, तो सरकार क्लब परिसर को वापस लेने और उस पर दोबारा कब्जा करने की कार्रवाई शुरू करेगी। इसके बाद 22 मई को क्लब को 5 जून तक कैंपस खाली करने का ऑर्डर दिया है।
क्लब ने दूसरी जगह जमीन देने की मांग की
सोमवार को L&DO को लिखे पत्र में क्लब की आम समिति ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय से आग्रह किया कि यदि क्लब को मौजूदा जगह से हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो संस्था को दूसरी जगह जमीन आवंटित करने पर विचार किया जाए। समिति का कहना है कि क्लब को किसी दूसरी जगह शिफ्ट करना आसान नहीं होगा, क्योंकि दशकों में विकसित किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं को दोबारा तैयार करने में भारी खर्च आएगा।
सदस्यों के हितों की चिंता
कमेटी के एक सदस्य ने कहा कि क्लब से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले सदस्यों, कर्मचारियों और अन्य हितधारकों के हितों की रक्षा जरूरी है। समिति ने यह भी बताया कि क्लब से जुड़े करीब 600 कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है और उनके लिए सुरक्षा की मांग की जा रही है।
NCLT आदेश के बाद सुधार का दावा
आम समिति ने अपने पत्र में कहा कि उसने 1 अप्रैल 2022 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के आदेश के बाद क्लब का कार्यभार संभाला था। तब से पिछले चार वर्षों में प्रशासन और वित्तीय स्थिति को सुधारने की दिशा में लगातार काम किया गया। समिति के अनुसार, 2021-22 में क्लब को 12.39 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था, जबकि 2023-24 के अनुमानित लाभ-हानि विवरण में 9.25 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया गया है।
बिना नई सदस्यता के बढ़ाई आय
समिति ने दावा किया कि यह वित्तीय सुधार बिना नई सदस्यता जोड़े हासिल किया गया। पहले नई सदस्यता क्लब की आय का बड़ा स्रोत हुआ करती थी। इसके अलावा प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया गया, सभी विभागों में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर लागू किए गए और लेबर विवादों समेत कई लंबित मामलों को कम किया गया।
रिकॉर्ड डिजिटाइज करने का भी दावा
कमेटी के मुताबिक, सदस्यता रिकॉर्ड को डिजिटाइज और अपडेट करने का काम भी किया गया है। 2022 में लगभग 43 प्रतिशत रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे। समिति ने यह भी कहा कि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) द्वारा नियुक्त सदस्य मानद आधार पर काम कर रहे हैं और उन्हें किसी प्रकार की सिटिंग फीस या वित्तीय लाभ नहीं दिया जा रहा।
क्लब सदस्यों ने कार्रवाई को बताया गैर-कानूनी
सोमवार को क्लब सदस्यों की एक बैठक भी हुई, जिसमें प्रस्तावित अधिग्रहण को ‘गैर-कानूनी’ बताया गया। सदस्यों ने आरोप लगाया कि संस्था के खिलाफ चुनिंदा कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना था, ‘एक जैसे क्लबों के साथ एक जैसा ही बर्ताव होना चाहिए। क्लब को सरकारी जमीन का ‘गैर-कानूनी’ इस्तेमाल करने वाला मानना गुमराह करने वाला है।’
खेल और सामाजिक गतिविधियों की जगह
सदस्यों का कहना है कि इस परिसर का इस्तेमाल हजारों सदस्य और उनके परिवार खेल-कूद, मनोरंजन और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सदस्यता के लिए लंबी वेटिंग लिस्ट इस बात का प्रमाण है कि क्लब की मांग बहुत अधिक है, न कि यह कि संस्था गैर-कानूनी तरीके से चल रही है।
1913 में हुई थी क्लब की स्थापना
1913 में स्थापित दिल्ली जिमखाना क्लब को राजधानी की सबसे पुरानी खेल और सामाजिक संस्थाओं में गिना जाता है। सदस्यों का कहना है कि इस क्लब की विरासत और ऐतिहासिक महत्व उसकी जमीन की बाजार कीमत से कहीं ज्यादा बड़ा है। वहीं, क्लब प्रबंधन का दावा है कि वह L&DO और शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है ताकि क्लब अपनी मौजूदा जगह पर ही चलता रहे।
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