QUAD Countries Meeting in Delhi: भारत आज क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक की मेजबानी कर रहा है। नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे। इस बैठक में अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री भी शामिल हो रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
ट्रंप की चीन यात्रा के बाद हो रही बैठक
यह क्वाड बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चीन यात्रा के तुरंत बाद आयोजित की जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की भारत यात्रा का आज चौथा दिन है और क्वाड बैठक के बाद वह अमेरिका लौट जाएंगे। पिछले कुछ समय से क्वाड की सक्रियता को लेकर सवाल उठ रहे थे, क्योंकि अमेरिकी प्रशासन के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में इस समूह को लेकर ज्यादा रुचि नहीं दिखाई गई थी। पिछले वर्ष क्वाड शिखर सम्मेलन भी आयोजित नहीं हो पाया था। ऐसे में यह बैठक समूह की सक्रियता और रणनीतिक महत्व को फिर से मजबूत करने वाली मानी जा रही है।
होर्मुज स्ट्रेट और ऊर्जा संकट पर रहेगा फोकस
बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात प्रमुख एजेंडा रहेंगे। खास तौर पर ऊर्जा संकट और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने, साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकों पर भी विचार किया जाएगा।
इन देशों के विदेश मंत्री होंगे शामिल
नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री मोतेगी शामिल हो रहे हैं। क्वाड समूह भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का रणनीतिक गठबंधन है, जिसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखना है। भारत इस समय इस समूह की अध्यक्षता कर रहा है और इसी वजह से इस महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी कर रहा है।
जयशंकर और जापानी विदेश मंत्री के बीच हुई बातचीत
बैठक से पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके जापानी समकक्ष तोशिमित्सु मोतेगी के बीच सोमवार को द्विपक्षीय वार्ता भी हुई। इस दौरान पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक प्रभावों और ऊर्जा आपूर्ति में आ रही बाधाओं पर विशेष चर्चा की गई। जयशंकर ने बैठक में कहा, ‘भारत और जापान के बीच एक विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी है और यह इस बात का संकेत है कि हमारे संबंधों के व्यापक महत्व और व्यापक प्रभाव हैं।’
आर्थिक सुरक्षा और तकनीकी सहयोग पर जोर
बैठक के बाद सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में जयशंकर ने कहा, ‘यह चर्चा हमारे सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित थी, जिसमें आर्थिक सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा, शिपिंग, प्रौद्योगिकी और नवाचार, लोगों से लोगों के बीच संबंध शामिल हैं।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘हमने वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें पश्चिम एशिया की स्थिति और उसके प्रभाव शामिल हैं।’
75वीं वर्षगांठ की ओर बढ़ रहे भारत-जापान संबंध
जयशंकर ने आगे कहा, ‘जैसे-जैसे हम अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ की ओर बढ़ रहे हैं, हमारी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी आपसी फायदे के लिए लगातार गहरी और विविध होती जा रही है।’ भारत और जापान के बीच बढ़ता सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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