दिल्ली के रेस कोर्स क्षेत्र में स्थित प्रतिष्ठित जयपुर पोलो ग्राउंड(Jaipur Polo Ground) को लेकर चल रहा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने हाल ही में इस जमीन पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यह कदम उस समय उठाया गया जब अदालत ने इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) को राहत देने से इनकार कर दिया। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ग्राउंड के मुख्य द्वार को बंद कर दिया।
इसके साथ ही परिसर में आधिकारिक सील लगाई गई और एक नोटिस चस्पा किया गया जिसमें स्पष्ट किया गया कि यह भूमि अब सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज है। नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था इस जमीन पर अवैध कब्जा, निर्माण या किसी प्रकार की अनधिकृत गतिविधि करती है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अदालत के फैसलों के बाद बदली स्थिति
यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब पटियाला हाउस कोर्ट ने इंडियन पोलो एसोसिएशन द्वारा दायर उस याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया जिसमें बेदखली आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने साफ किया कि पहले से जारी आदेश पर फिलहाल कोई अंतरिम सुरक्षा नहीं दी जा सकती। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर तेजी दिखाते हुए केंद्र सरकार ने ग्राउंड पर कब्जे की प्रक्रिया शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की गई है।
करीब 15 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले इस पोलो ग्राउंड को लेकर केंद्र सरकार और IPA के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। सरकार का पक्ष रहा है कि यह भूमि सार्वजनिक और रणनीतिक जरूरतों के लिए आवश्यक है जबकि एसोसिएशन इसे अपने उपयोग की संपत्ति बताता रहा है। IPA ने बेदखली आदेश को चुनौती देते हुए पहले पटियाला हाउस कोर्ट और फिर उच्च न्यायालय का रुख किया था, लेकिन दोनों ही जगहों पर उसे अंतरिम राहत नहीं मिल सकी।
केंद्र की ओर से दिया गया ये तर्क
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि संबंधित जमीन पर कोई वैध लीज समझौता प्रभावी नहीं है। सरकार के वकीलों ने यह भी कहा कि जिस आधार पर रोक की मांग की जा रही है वह कानूनी रूप से मजबूत नहीं है।