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विधि-विधान से खोले गए बाबा केदारनाथ धाम के कपाट, 51 क्विंटल ताजे गेंदे के फूलों से सजा भव्य दरबार, CM धामी ने भी किए दर्शन 

हिमालय की शांत और पवित्र वादियों में बसे केदारनाथ धाम(Baba Kedarnath Dham) के कपाट आज विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। इस खास मौके पर मंदिर को ताजे गेंदे के फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया, जिससे पूरा परिसर भक्ति और उल्लास से भर उठा। कपाट खुलने के समय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। उन्होंने अपनी पत्नी के साथ बाबा केदारनाथ के दिव्य दर्शन किए। इस विशेष मौके पर देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखने को मिला और पूरे धाम में ‘हर हर महादेव’ के जयकारे गूंजते दिखाई दिए।

केदारनाथ धाम 11वें ज्योतिर्लिंग के रूप में है विशेष

केदारनाथ धाम को द्वादश ज्योतिर्लिंगों में ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है। यह उत्तराखंड के चार धामों में शामिल है और पंच केदार में भी इसका प्रमुख स्थान माना जाता है। हर साल गर्मी के दिनों में यहां करीब छह महीने तक श्रद्धालु दर्शन कर पाते हैं, जबकि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। उस दौरान पूजा-अर्चना ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में होती है।

 

Baba Kedarnath Dham

पांडवों ने की थी शिवलिंग की स्थापना

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए यहां आए थे। कहा जाता है कि भगवान शिव ने उन्हें महिष रूप में दर्शन दिए, जिसके बाद इस स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की गई। मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग त्रिकोणीय आकार का है, जो इसे विशेष बनाता है। एक अन्य मान्यता यह भी है कि इस क्षेत्र में सतयुग के दौरान नर-नारायण ने तपस्या की थी।

Baba Kedarnath Dham

मंदाकिनी नदी का उद्गम भी यहीं से माना जाता है। हर वर्ष अप्रैल या मई में कपाट खोले जाते हैं और दीपावली के बाद भैयादूज के दिन शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं। कपाट खुलने के अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विशेष पूजा की जाती है। पूरी प्रक्रिया वैदिक मंत्रों और धार्मिक परंपराओं के साथ संपन्न होती है, जो इस धाम की आस्था और महत्व को और गहरा करती है।

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