इलाहाबाद विश्वविद्यालय(Allahabad University) ने स्नातक (UG) प्रवेश प्रक्रिया में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। नए नियम के तहत अब विश्वविद्यालय से बीए (BA) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए जनरल एप्टीट्यूट टेस्ट (GAT) देना अनिवार्य नहीं रहेगा। इस बदलाव से उन अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी जिन्होंने कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG) में GAT परीक्षा नहीं दी थी। ऐसे छात्र भी अब निर्धारित नियमों के अनुसार मेरिट सूची में शामिल हो सकेंगे।
पहले कैसे तैयार होती थी मेरिट?
अब तक बीए प्रवेश के लिए मेरिट तैयार करते समय CUET-UG के डोमेन विषय, भाषा (Language) और GAT के अंकों को मिलाकर कुल स्कोर बनाया जाता था। इसी पूरे स्कोर के आधार पर अभ्यर्थियों की रैंक तय होती थी और सीट आवंटित की जाती थी। इसलिए GAT न देने वाले छात्रों के लिए प्रवेश की संभावना लगभग समाप्त हो जाती थी।
नए नियम के तहत क्या होगा?
संशोधित व्यवस्था के मुताबिक, जिन अभ्यर्थियों ने GAT नहीं दिया है, उनकी मेरिट तैयार करते समय GAT के स्थान पर शून्य (0) अंक जोड़े जाएंगे। वहीं, जिन उम्मीदवारों ने GAT परीक्षा दी है उनके वास्तविक GAT अंक कुल स्कोर में शामिल किए जाएंगे। इस प्रकार अब GAT न देने वाले छात्र भी प्रवेश प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे हालांकि मेरिट उनके कुल प्राप्तांकों के आधार पर ही निर्धारित होगी।
डोमेन विषय में भी हुआ बदलाव
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी ने बीए प्रवेश के लिए मान्य CUET-UG डोमेन विषयों की संख्या 18 से बढ़ाकर 23 कर दी है। इसके साथ ही अब अभ्यर्थियों के सबसे ज्यादा अंक वाले डोमेन विषय के आधार पर मेरिट तैयार की जाएगी।
वहीं, यदि किसी उम्मीदवार ने हिंदी और अंग्रेजी जैसी एक से अधिक भाषा परीक्षाएं दी हैं, तो मेरिट में उसी भाषा के अंक शामिल होंगे जिसमें उसका स्कोर सबसे अधिक होगा। इस बदलाव का उद्देश्य प्रवेश प्रक्रिया को अधिक लचीला और पारदर्शी बनाना है।