UP News : इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, फर्जी सर्टिफिकेट पर टीचर बने तो खैर नहीं
उत्तर प्रदेश में जाली दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक की नौकरी पाने वालों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
उत्तर प्रदेश में जाली दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक की नौकरी पाने वालों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने न सिर्फ ऐसी नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश दिया है, बल्कि अब तक ली गई सैलरी की रिकवरी के भी निर्देश दिए हैं।
पूरे प्रदेश में होगी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच
जस्टिस मंजू रानी चौहान की सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को पूरे उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट शिक्षकों के दस्तावेजों की व्यापक जांच कराने का मैंडमस जारी किया है। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को यह प्रक्रिया छह महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है।
देवरिया केस से जुड़ा है मामला
यह आदेश देवरिया की गरिमा सिंह की याचिका पर आया है। गरिमा सिंह को निवास और शैक्षिक दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। उन्होंने अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी थी और दलील दी कि वे जुलाई 2010 से करीब 15 साल तक बिना किसी शिकायत के सेवा देती रहीं।
शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य पर खतरा
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की यह न सिर्फ धोखाधड़ी को बढ़ावा देती है, बल्कि पूरी शिक्षा प्रणाली की जड़ों को कमजोर करती है। इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ता है, जो बेहद गंभीर चिंता का विषय है।
सैलरी भी होगी रिकवरी
कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि फर्जी शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द की जाएं। साथ ही, अब तक दी गई सैलरी की रिकवरी की जाए। जिन अधिकारियों ने ऐसी नियुक्तियों में लापरवाही बरती या मिलीभगत की, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
सरकार पर बढ़ा दबाव
इस फैसले के बाद बेसिक शिक्षा विभाग और राज्य सरकार पर दबाव बढ़ गया है। आने वाले महीनों में बड़े पैमाने पर जांच और कार्रवाई की संभावना है, जिससे फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले शिक्षकों और जिम्मेदार अफसरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
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