Thursday, February 19, 2026
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कांग्रेस सरकार के एक फैसले से आरक्षण की सुविधा से वंचित था समाज का बड़ा वर्ग, नायब सरकार ने पहली कलम से बदला फैसला

चंद्रशेखर धरणी, चंडीगढ़ : हरियाणा की नायब सरकार ने शपथ ग्रहण के बाद पहली कैबिनेट मीटिंग में सालों से बंद पड़े डीएससी (वंचित समाज) के आरक्षण को फिर से चालू करने का फैसला लिया। सरकार के इस फैसले की समाज में हर ओर तारीफ की जा रही है। वहीं, आज भी अधिकांश लोग यह नहीं जानते कि समाज के एक बड़े तबके को आरक्षण की इस सुविधा से कैसे महरूम होना पड़ा ? आखिर पड़ोसी राज्य पंजाब में जब डीएससी की सुविधा लागू थी तो फिर हरियाणा में इसका लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा था। पूर्व एचसीएस अधिकारी और हरियाणा सरकार के पूर्व ओएसडी अमरजीत सिंह ने इसे लेकर एक बड़ा खुलासा किया।

भजनलाल ने किया था वर्गीकरण

अमरजीत सिंह ने बताया कि डीएससी के इतिहास को देखे तो 1994 में भजनलाल ने एससी-ए, बी का वर्गीकरण किया था। उसके बाद 2005 तक यह लागू रहा। उस समय वंचित समाज में 36 बिरादरियां आती थी, जिनकी संख्या अब 42 के करीब पहुंच गई है। उस दौरान उन्हें बहुत नौकरियां मिली। 2005 के बाद पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में देवेंद्र सिंह बनाम स्टेट ऑफ पंजाब एक केस आया, जिसमें कहा गया कि इस प्रकार से वर्गीकरण लागू करके आरक्षण में आरक्षण नहीं दिया जा सकता। इसके बाद पंजाब सरकार ने विधानसभा में इस पर बिल लाया गया और एक्ट बनाकर इसे लागू रखा, जबकि हरियाणा सरकार ने इसे कोर्ट के फैसले के बाद आगे नहीं लागू किया।

कांग्रेस ने खत्म किया था डीएससी

सिंह ने बताया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में जाने पर एक अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि राज्य सरकारें अपने स्तर पर इसे लागू कर सकती है। 2006 में कांग्रेस ने एससी-ए और बी में इसे खत्म किया था। उससे वंचित समाज के बच्चों को नौकरियां बहुत कम मिली।

मनोहर लाल ने की थी शुरूआत

2019 में जींद में आयोजित कबीर जयंती समारोह में यह मांग रखी गई कि वंचित समाज शिक्षा और नौकरियों में बहुत पिछड़ गया है। चूंकि केस सुप्रीम कोर्ट में था, ऐसे में उस समय के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इसे शिक्षा में लागू किया। इससे प्रोफेशनल कोर्ट में वंचित समाज के बच्चों के एडमिशन की संख्या बढ़ी।

बीजेपी ने सवर् समाज के लिए काम किया

अमरजीत सिंह ने कहा कि बीजेपी ने केवल वंचित समाज ही नहीं, बल्कि सर्व समाज के लिए काम किया है। बिना पर्ची-बिना खर्ची नौकरी इसका एक जीता जागता उदाहरण है। उन्होंने बताया कि 2022 में रोहतक में फिर से कबीर जयंती का आयोजन हुआ। उस समय भी समाज के लोगों ने पदोन्नति में आरक्षण लागू करने की मांग की। मनोहर लाग ने उसे भी लागू कर दिया।

समाज की एक पीढ़ी पीछे गई

सिंह ने बताया कि कांग्रेस के एक फैसले के कारण वंचित समाज की एक पीढ़ी बहुत पीछे चली गई है, क्योंकि 2006 तक डीएससी लागू था। हाईकोर्ट के फैसले पर हरियाणा ने इसे खत्म कर दिया और पंजाब ने लागू रखा। 18 साल का एक लंबा अरसा होता है। ऐसे में कांग्रेस के एक फैसले के कारण समाज की एक पीढ़ी पीछे चली गई है। उन्होंने कहा कि वंचित वर्ग हर समाज में होता है। फिर वह चाहे किसान, कमेरा या बैकवर्ड समाज हो, हर वर्ग में यह होता है।

हरियाणा बना पहला प्रदेश

अमरजीत सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डीएससी में वर्गीकरण लागू करने वाला हरियाणा पहला प्रदेश बन गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चुनाव से पूर्व सत्ता में आने पर इसे लागू करने का ऐलान किया था और अपने वादे के अनुसार शपथ लेते ही कैबिनेट की पहली बैठक में ही उन्होंने इसे लागू करने का फैसला लिया।

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