Friday, February 13, 2026
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अनिल विज ने लगाई मंत्री पद की हैट्रिक, बैंक की नौकरी छोड़ सुषमा स्वराज की सीट से लड़े थे चुनाव, जानें विज का राजनीतिक इतिहास

चंद्रशेखर धरणी, चंडीगढ़ : प्रदेश में हैट्रिक लगाते हुए लगातार तीसरी बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार के साथ ही अनिल विज ने भी मंत्री पद की हैट्रिक लगाई है। हालांकि विज को इस बार कौन सा विभाग दिया जाएगा, इसका फैसला बाद में होगा, लेकिन अनिल विज एक ऐसा नाम है, जिसे हरियाणा का हर शख्स जानता और पहचानता है। अंबाला से लगातार सातवीं बार विधायक चुने गए अनिल विज अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं। पंचकूला के सेक्टर 5 के परेड ग्राउंड में हुए शपथ ग्रहण से पहले ही अनिल विज ने बताया दिया था कि उन्हें मंत्री पद के लिए फोन आया है। एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि पार्टी जो दायित्व देगी उसको निष्ठा के साथ निभाएंगे।

छात्र राजनीति से जुड़े

गुरुवार को शपथ ग्रहण समारोह में अनिल विज अपने परिवार के साथ पहुंचे। अनिल विज का जन्म 15 मार्च 1953 को हरियाणा में हुआ। वह पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छात्र शाखा में थे। अनिल विज ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जरिए छात्र राजनीति में कदम रखा। वह एसडी कॉलेज, अंबाला कैंट में पढ़ते हुए राजनीति में एक्टिव रहे। 1970 में एबीवीपी ने अनिल विज को महासचिव बनाया।

बैंक में की नौकरी

अनिल विज ने विश्व हिंदू परिषद, भारत विकास परिषद बीएमएस और ऐसे अन्य संगठनों के साथ सक्रिय रूप से काम किया। अनिल विज विज 1974 में भारतीय स्टेट बैंक में नौकरी करने लगे लेकिन बीजेपी से जुड़े रहे।

सुषमा स्वराज की जगह लड़े उपचुनाव

1990 में जब सुषमा स्वराज राज्यसभा के लिए चुनी गईं तो अंबाला छावनी की सीट खाली हो गई। अनिल विज ने बैंक की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और सुषमा स्वराज की सीट से उपचुनाव लड़े। अनिल विज यह उपचुनाव जीत गए। करीब 34 साल पहले 27 मई 1990 को तत्कालीन सातवीं हरियाणा विधानसभा में दो रिक्त हुई सीटों पर उपचुनाव हुए थे। उस समय ओम प्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री हुआ करते थे। तब दडवा कला हलके से जनता दल की टिकट पर पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और अंबाला कैंट से अनिल कुमार विज विधायक निर्वाचित हुए थे। तब अनिल विज की आयु 37 वर्ष की थी। बैंक की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए अनिल विज 2019 में हुए 14वीं विधानसभा के चुनाव में लगातार तीसरी बार और कुल छठी बार अंबाला छावनी से चुनाव जीते थे।

अगर अंबाला छावनी का इतिहास जाना जाए तो करीब 57 वर्ष पूर्व ज्वाइंट पंजाब से अलग होने के बाद एक नवंबर 1966 को हरियाणा नया राज्य बना था। 13 विधानसभा चुनावों और एक उपचुनाव में अंबाला छावनी से सात बार भारतीय जनसंघ, जनता पार्टी, वर्तमान भाजपा और पांच बार कांग्रेस ने विजयश्री हासिल की। दो बार यहां से निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में अनिल विज भी जीते हैं। सर्व प्रथम 1967 में हुए चुनाव में यहां से देवराज आनंद भारतीय जनसंघ के पी नाथ को हराकर अंबाला छावनी से पहले विधायक बने थे।

उल्लेखनीय है कि भाजपा की तेज तर्रार और राष्ट्रीय नेता के रूप में छवि रखने वाली सुषमा स्वराज हरियाणा से संबंधित है तथा 1987 में विधानसभा के आम चुनाव में अंबाला छावनी से ही विधायक और मंत्री बनी थी। अप्रैल 1990 में सुषमा स्वराज को राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया गया था, जिसके चलते उन्हें विधायक के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। भाजपा की इस दिवंगत नेत्री ने 1977 व 1987 में पहले जनसंघ और फिर भाजपा की टिकट पर अंबाला से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। जनसंघ को अंबाला छावनी की सीट सबसे पहले 1968 में मिली, जब जनसंघ में उम्मीदवार रहे भगवान दास सहगल ने देव राज आनंद को पराजित किया था। अनिल विज को 1991 में सातवीं हरियाणा विधानसभा समय से पूर्व भंग हो जाने पर फिर से चुनाव लड़ना पड़ा और जून 1991 में अनिल विज भाजपा की टिकट पर यहां विजय रहे थे।

बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में उस समय के हालात के अनुसार अनिल विज को भाजपा से किनारा करना पड़ा और एक अप्रैल 1996 तथा फऱवरी 2000 में हुए दो विधानसभा चुनावों में निर्दलीय के रूप में अंबाला कैंट से विधायक बने। 2005 में विधानसभा के आम चुनाव में अनिल विज 615 वोट से अपनी हैट्रिक बनाने से चूक गए। 2007 में उन्होंने विकास परिषद के नाम से अपनी एक अलग राजनीतिक पार्टी भारतीय चुनाव आयोग से पंजीकृत करवाई। 2009 में हरियाणा विधानसभा के आम चुनाव से पहले भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा उन पर फिर से भरोसा जताया गया और उन्हें भाजपा की टिकट दी गई। विज 2009, 2014, 2019 में लगातार तीन बार विधायक बने और अपनी हैट्रिक लगाई। अब 2024 में विज ने अंबाला कैंट से लगातार चौथी बार और कुल सातवीं बार जीत दर्ज की है। ऐसे में अब सबकी नजरें इसी बात पर लगी है कि इस बार अनिल विज को सरकार में कौन से विभाग दिए जाते हैं ?

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