Stephen Miller: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को मिली हार के बाद अपनी टीम में बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने अपने सबसे भरोसेमंद सलाहकार स्टीफन मिलर को व्हाइट हाउस का नया चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया है। मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को मिली करारी हार के बाद हुए इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है। मिलर 9 नवंबर, सोमवार से नई जिम्मेदारी संभालेंगे। वह सुसी वाइल्स की जगह लेंगे, जो इस पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला थीं। खास बात यह है कि चुनावी झटके के बावजूद ट्रंप ने अपनी सख्त आव्रजन नीतियों के प्रमुख रणनीतिकार पर ही भरोसा जताया है।
कौन हैं स्टीफन मिलर?
41 वर्षीय स्टीफन मिलर का जन्म अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के सांता मोनिका में हुआ था। उन्होंने साल 2017 में ट्रंप के पहले राष्ट्रपति कार्यकाल से कुछ समय पहले उनके लिए भाषण लिखने का काम शुरू किया था। इससे पहले वह रिपब्लिकन पार्टी के कई नेताओं के सहयोगी के रूप में काम कर चुके थे। इनमें पूर्व सीनेटर जेफ सेशंस का नाम भी शामिल है। साल 2016 के चुनाव अभियान के बाद से ही मिलर ट्रंप के सबसे करीबी सलाहकारों में गिने जाते हैं। ट्रंप की कई बड़ी नीतियों को तैयार करने में उनकी अहम भूमिका रही है। इसी वजह से उन्हें अक्सर राष्ट्रपति का ‘दिमाग’ भी कहा जाता है।
मुस्लिम देशों पर यात्रा प्रतिबंध लगाने में रही अहम भूमिका
स्टीफन मिलर की पहचान ट्रंप की सख्त आव्रजन नीतियों के प्रमुख चेहरों में होती है। ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान कई मुस्लिम बहुल देशों के नागरिकों पर यात्रा प्रतिबंध लगाने की नीति तैयार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। वहीं, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में वह बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों को अमेरिका से बाहर भेजने के अभियान के प्रमुख रणनीतिकार बने। डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ और होमलैंड सिक्योरिटी सलाहकार के रूप में भी उन्होंने अमेरिका की घरेलू नीतियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
चुनावी हार के बाद ट्रंप ने क्यों जताया भरोसा?
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक नुकसान हुआ है। डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। ऐसे में ट्रंप के सामने सरकार की प्राथमिकताओं और राजनीतिक रणनीति को लेकर कई चुनौतियां हैं। इस स्थिति में मिलर को चीफ ऑफ स्टाफ बनाना संकेत देता है कि राष्ट्रपति अपनी सख्त नीतियों में नरमी लाने के बजाय उन्हें और मजबूती देना चाहते हैं। खासकर आव्रजन के मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन का रुख पहले की तरह सख्त रह सकता है।
कितना ताकतवर होता है चीफ ऑफ स्टाफ का पद?
व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ का पद अमेरिकी प्रशासन के सबसे प्रभावशाली पदों में गिना जाता है। इस पद पर नियुक्त व्यक्ति राष्ट्रपति के रोजाना के कामकाज, बैठकों, प्रशासनिक प्राथमिकताओं और महत्वपूर्ण फैसलों के बीच तालमेल बनाने की जिम्मेदारी संभालता है। ऐसे में नई भूमिका मिलने के बाद सरकार की नीतियों और अहम फैसलों पर स्टीफन मिलर का प्रभाव पहले से अधिक बढ़ सकता है।
नई जिम्मेदारी पर क्या बोले स्टीफन मिलर?
नियुक्ति की घोषणा के बाद मिलर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नई जिम्मेदारी के साथ उनका मिशन पहले से ज्यादा स्पष्ट हो गया है। वह पूरी ताकत के साथ राष्ट्रपति का समर्थन करने और अमेरिका की रक्षा के लिए काम करेंगे। वहीं, ट्रंप ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर नियुक्ति की जानकारी दी थी। उन्होंने मिलर को अपना सबसे भरोसेमंद सलाहकार बताते हुए कहा, ‘स्टीफन शुरू से मेरे साथ हैं. वह मेरी बात समझते हैं.’ ट्रंप के समर्थकों ने भी इस फैसले का स्वागत किया। रिपब्लिकन पार्टी के पूर्व सांसद मैट गेट्ज ने खुशी जाहिर करते हुए लिखा, ‘IT’S MILLER TIME.’
सुसी वाइल्स की होगी विदाई
स्टीफन मिलर की नियुक्ति के साथ ही सुसी वाइल्स का चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्यकाल समाप्त हो रहा है। 69 वर्षीय वाइल्स इस पद पर पहुंचने वाली अमेरिका की पहली महिला थीं। वह लंबे समय से ट्रंप की सलाहकार रही हैं और उनके चुनाव अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं। वाइल्स ने एक्स पर बयान जारी कर बताया कि शुक्रवार को चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में उनका आखिरी दिन होगा। उन्होंने ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में काम करने को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया। साथ ही सीमा सुरक्षा मजबूत करने, टैक्स कम करने और अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने जैसे कार्यों का भी जिक्र किया।
ट्रंप प्रशासन में तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने भी दिया इस्तीफा
मिडटर्म चुनाव में हार के बाद ट्रंप प्रशासन में बदलाव का सिलसिला जारी है। स्टीफन मिलर की नियुक्ति के अलावा न्याय विभाग के तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस्तीफे का ऐलान किया है। इनमें नागरिक अधिकार विभाग की असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल हरमीत कौर ढिल्लों, राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग के असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल जॉन आइजनबर्ग और फ्लोरिडा के दक्षिणी जिले के अमेरिकी अटॉर्नी जेसन रेडिंग क्विनोन्स शामिल हैं।
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