जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान के नए फैसले पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने अपनी नई रेड बुक में अजहर को भगोड़ा घोषित करते हुए उसके सिर पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम रखा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस घोषणा को लेकर पाकिस्तान की गंभीरता पर सवाल उठाए हैं।
#WATCH | Delhi | On Pakistan announcing a reward of PKR 70 lakh on Jaish-e-Mohammed (JeM) chief Masood Azhar, MEA Official Spokesperson Randhir Jaiswal says, "Such gimmicks and attempts at hoodwinking people by Pakistan are nothing new. We have seen similar gimmicks in the past… pic.twitter.com/DgmYcYaPk1
— ANI (@ANI) September 15, 2026
रणधीर जायसवाल बोले- ऐसे हथकंडे पहले भी देखे
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से इस तरह की घोषणाएं और लोगों को गुमराह करने की कोशिश कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देश की तरफ से की जाने वाली ऐसी घोषणाओं की वास्तविकता सभी जानते हैं। जायसवाल के मुताबिक, पाकिस्तान को केवल इनाम घोषित करने जैसी कार्रवाइयों के बजाय ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिनका जमीन पर वास्तविक परिणाम दिखाई दे।
रेड बुक में मसूद अजहर को बताया भगोड़ा
पाकिस्तान की नई रेड बुक में मसूद अजहर को भगोड़ा बताया गया है और उसके ऊपर घोषित इनाम को बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अक्टूबर में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक प्रस्तावित है। रिपोर्टों में इसे पाकिस्तान की वैश्विक निगरानी और संभावित ग्रे लिस्ट से जुड़े दबाव के संदर्भ में देखा जा रहा है। पाकिस्तान पहले भी अजहर को लेकर कार्रवाई के दावे करता रहा है।
2021 से अफगानिस्तान में होने का दावा
पाकिस्तान की ओर से 2021 से यह कहा जाता रहा है कि मसूद अजहर उसके देश में नहीं है और वह अफगानिस्तान चला गया है। इसी दौरान FIA ने उस पर 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित किया था। हालांकि, भारतीय खुफिया एजेंसियां लंबे समय से दावा करती रही हैं कि अजहर पाकिस्तान में ही छिपा हुआ है। कुछ रिपोर्टों में उसके सिंध प्रांत के नवाबशाह में होने की बात कही गई है। ऐसे में अब 70 लाख रुपये के इनाम और रेड बुक में नाम शामिल किए जाने के बाद भारत की ओर से पाकिस्तान से वास्तविक जांच, गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है।
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