नेपाल में आई बाढ़(Nepal Flood) और भूस्खलन के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी को लेकर विदेश मंत्रालय ने अहम जानकारी साझा की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, 28 अगस्त 2026 को 149 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल पहुंच गए। मंत्रालय लगातार काठमांडू के संपर्क में है जिससे वहां पहुंचने वाले लोगों को जरूरी सहायता मिल सके।
रणधीर जायसवाल ने बताया कि काठमांडू तक पहुंचने में फिलहाल बड़ी दिक्कत नहीं है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती नेपाल के उन ऊपरी और प्रभावित जिलों में फंसे लोगों को बाहर निकालना है जहां बाढ़ और प्राकृतिक आपदा का असर ज्यादा हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राहत एवं निकासी अभियान के लिए अभी किसी विशेष कोड नेम की घोषणा नहीं की गई है।
महाराष्ट्र के 37 श्रद्धालु भी पहुंचे काठमांडू
चीन से शुक्रवार दोपहर नेपाल पहुंचे 53 भारतीयों के एक समूह में महाराष्ट्र के 37 तीर्थयात्री भी शामिल थे। ये श्रद्धालु कैलास मानसरोवर यात्रा पूरी करके लौट रहे थे लेकिन खराब हालात के कारण तिब्बत के सागा में फंस गए थे। बाद में सभी को सुरक्षित रूप से काठमांडू पहुंचाया गया।
CM फडणवीस की पहल से मिली मदद
इन श्रद्धालुओं के सागा में फंसे होने की जानकारी नितिन शिर्के और राकेश जितेकर ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के माध्यम से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक पहुंचाई। जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने विदेश मंत्रालय के साथ तेजी से समन्वय किया।
केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से श्रद्धालुओं ने 28 अगस्त की सुबह करीब 6 बजे सागा से न्यालम चेक पोस्ट के रास्ते काठमांडू के लिए यात्रा शुरू की और सुरक्षित पहुंच गए। इन 37 श्रद्धालुओं की वापसी इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि उनकी काठमांडू से भारत लौटने की फ्लाइट 29 अगस्त को दोपहर 2 बजे निर्धारित थी। समय पर काठमांडू पहुंचने के बाद उनकी आगे की यात्रा संभव हो सकी। संकट की घड़ी में मदद मिलने पर श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र सरकार और विदेश मंत्रालय के प्रति आभार जताया।